मुद्द्या ए रोजगार…. बदल रहा है नौकरी का बाजार-संजय सक्सेना

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जहां सिर्फ डिग्री और सामान्य योग्यता के आधार पर रोजगार हासिल करना लगातार मुश्किल होता जा रहा है। कंपनियां अब बड़ी संख्या में कर्मचारियों की भर्ती करने के बजाय ऐसे लोगों की तलाश कर रही हैं, जो किसी खास तकनीक, कारोबार या काम की जरूरत को तुरंत पूरा कर सकें। सितंबर के रोजगार आंकड़े इसी बदलती तस्वीर की ओर इशारा करते हैं। नौकरी डॉट कॉम की जॉबस्पीक रिपोर्ट के मुताबिक सितंबर में कुल व्हाइट-कॉलर भर्ती सूचकांक सालाना आधार पर 2 प्रतिशत बढ़कर 3,053 हो गया। पिछले साल इसी महीने यह 3,002 था। पहली नजर में यह वृद्धि बहुत बड़ी नहीं लगती, लेकिन इसके भीतर रोजगार बाजार का एक महत्वपूर्ण बदलाव छिपा है। एक तरफ कुल भर्तियां लगभग स्थिर हैं, दूसरी तरफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग से जुड़े रोजगार में सालाना 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यानी कंपनियां भर्ती रोक नहीं रही हैं, बल्कि भर्ती का तरीका बदल रही हैं। अब सवाल यह नहीं है कि कितने लोगों को नौकरी पर रखा जाए, बल्कि यह है कि किस कौशल वाले व्यक्ति को रखा जाए। लेकिन यहां एक सवाल फिर भी उठता है, वो ये कि अनुभव के लिए भी कहीं काम तो मिलना ही चाहिए, वो कैसे मिले? पहली नौकरी तो बिना अनुभव वाली ही होती है। एआई और मशीन लर्निंग इस बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण बनकर सामने आए हैं। इस क्षेत्र में 13 से 16 साल के अनुभव वाले पेशेवरों की मांग में 54 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज होना बताता है कि तकनीकी बदलाव का मतलब केवल युवाओं के लिए नए अवसर पैदा होना नहीं है। कंपनियां अनुभवी कर्मचारियों के ज्ञान और एआई जैसी नई तकनीक के मेल को भी महत्व दे रही हैं। 8 से 12 साल अनुभव वाले पेशेवरों की मांग में 28 प्रतिशत वृद्धि भी इसी दिशा का संकेत है। हालांकि तस्वीर का दूसरा पहलू भी उतना ही महत्वपूर्ण है। 4 से 7 साल के अनुभव वाले पेशेवरों की भर्ती में 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई है। इसका अर्थ यह नहीं निकाला जाना चाहिए कि इस वर्ग के लिए रोजगार के अवसर खत्म हो रहे हैं, बल्कि यह संकेत जरूर है कि कंपनियां अब अनुभव की अवधि के साथ-साथ उसकी उपयोगिता और विशेषज्ञता को भी परख रही हैं। वैसे फ्रेशर्स के लिए भी अवसर पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। एआई/एमएल से जुड़े क्षेत्रों में शुरुआती स्तर के कर्मचारियों की भर्ती में 19 प्रतिशत वृद्धि दर्ज हुई है। लेकिन यहां भी चुनौती यही है कि केवल शैक्षणिक डिग्री पर्याप्त नहीं होगी। जिस युवा के पास एआई टूल्स, डेटा, क्लाउड, साइबर सुरक्षा, ऑटोमेशन या किसी अन्य उभरती तकनीक का व्यावहारिक ज्ञान होगा, उसके पास रोजगार बाजार में अपनी जगह बनाने की बेहतर संभावना होगी। यह बदलाव शिक्षा व्यवस्था के लिए भी एक गंभीर संदेश है। भारत में हर साल लाखों युवा डिग्रियां लेकर रोजगार बाजार में प्रवेश करते हैं। लेकिन उद्योग की जरूरतें तेजी से बदल रही हैं। विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पढ़ाए जाने वाले पाठ्यक्रम और कंपनियों की वास्तविक जरूरत के बीच अंतर अगर बढ़ता रहा तो डिग्रीधारी युवाओं की संख्या बढ़ने के बावजूद रोजगार योग्य युवाओं की कमी बनी रह सकती है। जीसीसी यानी ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर का विस्तार इस बदलते रोजगार बाजार का दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष है। सितंबर में जीसीसी से जुड़ी नौकरियों में सालाना 4 प्रतिशत वृद्धि हुई। हैदराबाद में 23 प्रतिशत, चेन्नई में 13 प्रतिशत और पुणे में 11 प्रतिशत की वृद्धि बताती है कि भारत अब केवल कम लागत वाले बैक-ऑफिस काम का केंद्र नहीं रहना चाहता। वैश्विक कंपनियां भारत में तकनीक, शोध, वित्त, डेटा और उच्च कौशल वाले कामों के लिए अपनी क्षमताएं बढ़ा रही हैं। इस स्थिति में सरकार, शिक्षा संस्थानों और युवाओं-तीनों के सामने अपनी-अपनी जिम्मेदारी है। सरकार के लिए चुनौती केवल रोजगार के आंकड़े बढ़ाना नहीं, बल्कि ऐसा कौशल तंत्र तैयार करना है जो उद्योग की बदलती जरूरतों के साथ कदम मिला सके। शिक्षा संस्थानों को पाठ्यक्रमों को तेजी से अपडेट करना होगा और कंपनियों के मुद्दा ए रोजगार…. बदल रहा है नौकरी का बाजार साथ प्रशिक्षण व इंटर्नशिप के रास्ते बढ़ाने होंगे। वहीं युवाओं को यह समझना होगा कि आज करियर की शुरुआत डिग्री हासिल करने के साथ नहीं, बल्कि लगातार सीखते रहने के साथ होती है। रोजगार बाजार का मौजूदा संकेत इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भविष्य की अर्थव्यवस्था का संकेत भी है। एआई कई पारंपरिक कामों की प्रकृति बदल सकता है, ले िइसके साथ नए काम और नई विशेषज्ञताएं भी पैदा हो 7 हैं। असली चुनौती यह है कि भारतीय युवा इन नए अवस के लिए कितनी जल्दी तैयार होते हैं। नौकरी बाजार फिलहाल कमजोर नहीं दिख रहा, लेकिन वह पहले जैसा भी नहीं रहा। कंपनियां अब संख्या से ज्यादा गुणवत्ता देख रही हैं। आने वाले समय में वही युवा और पेशेवर आगे बढ़ पाएंगे, जो अपने अनुभव को नई तकनीक से जोड़ सकेंगे और बदलती जरूरतों के अनुसार खुद को लगातार अपडेट करेंगे। इसलिए रोजगार की अगली लड़ाई केवल नौकरी पाने की नहीं होगी, बल्कि नौकरी के योग्य बने रहने की होगी। यही बदलते भारतीय नौकरी बाजार का सबसे बड़ा संदेश है।