वाशिंगटन। अमेरिका ने अज्ञात धमकियों के बाद यूके स्थित अपने सैन्य बेस से बॉम्बर विमानों को हटा लिया है। इस घटनाक्रम के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा दावा किया है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को पता है कि इन धमकियों के पीछे कौन है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि जिम्मेदार लोग बड़ी मुसीबत में फंस गए हैं।
क्या है पूरा मामला?:
अमेरिका की वायुसेना ने इंग्लैंड में स्थित अपने एक सैन्य एयरबेस से सभी बमवर्षक विमान वापस बुला लिए हैं। यह एयरबेस अमेरिकी नियंत्रण में है। यहां से ईरान पर हमले किए गए थे। यह कदम आरएएफ फेयरफोर्ड एयरबेस पर कथित आतंकी हमले की साजिश की जांच के बाद उठाया गया है। आरएएफ फेयरफोर्ड लंदन से करीब 100 मील यानी 160 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है। मध्य पूर्व में दशकों से चले आ रहे संघर्षों के दौरान अमेरिका इस एयरबेस का इस्तेमाल अपने बमवर्षक विमानों के लिए करता रहा है।
पेंटागन ने की वापसी की पुष्टि:
पेंटागन ने पुष्टि की है कि आरएएफ फेयरफोर्ड पर तैनात सभी अमेरिकी बॉम्बर्स मूल ठिकानों पर लौट रहे हैं, हालांकि उन्होंने नई चेतावनियों पर टिप्पणी करने से इन्कार कर दिया। अधिकारियों के अनुसार, यह नई जानकारी उसी खतरे का हिस्सा थी जो तीन हफ्ते पहले सामने आई थी, लेकिन पिछले 24 घंटों में कुछ विशिष्ट विवरण मिले और तत्परता की स्थिति अचानक बढ़ गई, जिसके बाद सैन्य कमांडरों ने तत्काल निकासी का फैसला लिया। मिलिट्री एयर ट्रैकिंग अलायंस जैसे विमानन गतिविधियों पर नजर रखने वाले समूहों ने ईरान युद्ध शुरू होने के शुरुआती दिनों से आरएएफ फेयरफोर्ड से दर्जनों बी-52 और बी-1 बमवर्षकों को उड़ान भरते देखा है। निगरानी करने वालों ने रविवार को कई बी-1 बमवर्षकों को इस एयरबेस से उड़ान भरते देखा।
ट्रंप के सामने ईरान को लेकर क्या विकल्प?:
यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ युद्ध को लेकर विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। इनमें नए हमले भी शामिल हैं। ट्रंप ने शुरुआत में अमेरिकी लोगों से कहा था कि यह अभियान कुछ हफ्तों तक चलेगा। व्हाइट हाउस से ओहायो में एक रैली के लिए रवाना होते समय ट्रंप ने शनिवार को पत्रकारों से कहा, ईरान को लेकर मेरे पास फैसले हैं, जो मैं करूंगा। ईरान तबाह हो चुका है। इसलिए एकमात्र सवाल यह है कि यह आसान तरीका होगा या मुश्किल तरीका।
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