देवीनवागांव का प्राचीन गणेश मंदिर आज भी आस्था का केंद्र, बुजुर्गों के पास जुड़ी हैं वर्षों पुरानी मान्यताएं

Follow Us

नरहरपुर। नरहरपुर विकासखंड मुख्यालय के ग्राम देवीनवागांव में विराजित भगवान गणेश की प्राचीन स्वयंभू प्रतिमा आज भी लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र बनी हुई है। गांव के बुजुर्गों के अनुसार इस प्रतिमा को लेकर वर्षों से एक अनोखी मान्यता चली आ रही है। बताया जाता है कि पहले समय के साथ भगवान गणेश की प्रतिमा के आकार में लगातार वृद्धि देखने को मिलती थी। इसी मान्यता के चलते यह मंदिर आसपास के ग्रामीणों के बीच विशेष श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है।

पीढ़ियों से चली आ रही मान्यता:
देवीनवागांव के बुजुर्ग बताते हैं कि इस प्राचीन मंदिर और स्वयंभू गणेश प्रतिमा से जुड़ी बातें उन्होंने अपने बुजुर्गों से सुनी हैं। पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही मान्यता के अनुसार प्रतिमा के आकार में पहले धीरे-धीरे वृद्धि होती थी। ग्रामीणों का कहना है कि समय के साथ प्रतिमा में होने वाला यह बदलाव लोगों के लिए कौतूहल और श्रद्धा दोनों का विषय रहा है। हालांकि वर्तमान समय में प्रतिमा के आकार में किसी तरह की विशेष वृद्धि या परिवर्तन देखने को नहीं मिल रहा है। इसके बावजूद ग्रामीणों की आस्था पहले की तरह ही बनी हुई है। लोगों का कहना है कि प्रतिमा के आकार में बदलाव दिखाई दे या न दिखाई दे, भगवान गणेश के प्रति उनकी श्रद्धा और विश्वास में कोई कमी नहीं आई है।

भाटापारा क्षेत्र के ग्राम सूरजपुरा में भूख-प्यास से करीब15 गायों की दर्दनाक मौत

आज भी पहुंचते हैं श्रद्धालु:
गांव के इस प्राचीन मंदिर में स्थानीय लोगों के साथ आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। विशेष अवसरों और गणेश उत्सव के दौरान मंदिर में धार्मिक वातावरण और भी भक्तिमय हो जाता है। श्रद्धालु भगवान गणेश की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं। ग्रामीणों के अनुसार यह मंदिर केवल पूजा का स्थान ही नहीं, बल्कि गांव की पुरानी धार्मिक परंपराओं और आस्था से जुड़ी पहचान भी है। बुजुर्गों के पास मंदिर और प्रतिमा से जुड़ी कई पुरानी बातें और मान्यताएं आज भी मौजूद हैं।

आस्था कायम, कौतूहल बरकरार:
स्वयंभू गणेश की प्रतिमा के आकार में पहले लगातार वृद्धि होने की मान्यता ने इस मंदिर को क्षेत्र में अलग पहचान दी है। हालांकि अभी प्रतिमा के आकार में कोई स्पष्ट परिवर्तन देखने को नहीं मिल रहा है, लेकिन वर्षों से चली आ रही इस मान्यता को लेकर लोगों में आज भी उत्सुकता बनी हुई है। देवीनवागांव के बुजुर्गों का कहना है कि समय बदल गया, पीढ़ियां बदल गईं, लेकिन इस प्राचीन मंदिर के प्रति लोगों की आस्था आज भी कायम है। यही वजह है कि स्वयंभू गणेश मंदिर आज भी देवीनवागांव की धार्मिक पहचान और ग्रामीणों की श्रद्धा का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है।

राजपुर के युवाओं ने थामा कांग्रेस का हाथ, विधायक इन्द्र साव ने कांग्रेस गमछा पहनाकर किया स्वागत