करुणा व्यंग्य की आत्मा होती है-डॉ माणिक विश्वकर्मा
व्यंग्य के माध्यम से समाज, राजनीति, व्यक्ति या व्यवस्था की कमियों, कुरीतियों ,पाखंडों, विसंगतियों,नाकामियों एवं धर्म, संस्कृति व रोजमर्रा जीवन में मौजूद दोहरे मानदंडों व आडंबरों पर लक्षणा एवं व्यंजना…
September 27, 2026
