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चरणस्पर्श से हैलो, हाय एवं हे तक– डॉ.माणिक विश्वकर्मा ‘

चरण स्पर्श करना एव प्रणाम करना बड़ों के प्रति आदर, श्रद्धा और विनम्रता प्रकट करने की सदियों पुरानी परंपरा है। भारतीय संस्कृति में अभिवादन के अनेक तरीके प्रचलित हैं जैसे…
May 17, 2026

ज्ञान परंपरा और जुमलेबाजी: गिरीश पंकज

इन दिनों भारतीय ज्ञान परंपरा को लेकर यत्र-तत्र-सर्वत्र व्याख्यान आयोजित किया जा रहे हैं. लेखमालाएँ सामने आ रही हैं. मेरा निजी अनुभव यही रहा है कि इन सब मामले में…
May 16, 2026

नीति आयोग की रिपोर्ट और सरकारी स्कूल – संजय सक्सेना

नीति आयोग की ताजातरीन रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दो दशकों में भारतीय माता-पिता का झुकाव सरकारी के बजाय प्राइवेट स्कूलों की तरफ तेजी से बढ़ा है। हालांकि, शिक्षा के क्षेत्र…
May 12, 2026

लोकतंत्र का इतिहास एवं विपक्ष की भूमिका – डॉ.माणिक विश्वकर्मा

लोकतंत्र अर्थात जनता की शक्ति की शुरुआत पाँचवी वीं शताब्दी ईसा पूर्व प्राचीन यूनानी राजनेता क्लीस्थेनेस ने की थी। उन्होंने बहिष्कार की व्यवस्था शुरू करके कुलीन वर्ग के प्रभाव को…
May 10, 2026

पश्चिम बंगाल: परिवर्तन के साथ पुनर्जागरण – राजनाथ सिंह

“हे नूतन, देखा दिक आर-बार, जन्मेरो प्रथम शुभोखोन” (हे नवीन, एक बार फिर से सामने आओ, ठीक उसी तरह जैसे जन्म के समय वह पहला शुभ क्षण आया था।) गुरुदेव…
May 9, 2026

परिणामों पर एसआईआर का धब्बा, पर ममता बनर्जी का बेतुका हठ – रंजन श्रीवास्तव

देश की आजादी के 78 वर्ष तथा 8 महीने के बाद तथा अपने वर्तमान अस्तित्व के 46 वर्ष तथा 28 दिन के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पश्चिम बंगाल…
May 7, 2026