बांग्लादेश में सूफी दरगाहें भी कट्टरपंथियों के निशाने पर, मजारों- उर्स समारोहों पर बढ़े हमले

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ढाका। बांग्लादेश में धार्मिक असहिष्णुता को लेकर नई चिंता सामने आई है। हालिया रिपोर्ट के अनुसार, हिंदू समुदाय के बाद अब सूफी परंपरा से जुड़े मजार, दरगाह और उर्स समारोह भी कट्टरपंथी समूहों के निशाने पर हैं। ढाका स्थित एक सूफी संगठन की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वर्ष 2026 की पहली छमाही में देशभर में कई सूफी स्थलों पर हमले दर्ज किए गए।

रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी से जून के बीच कम से कम छह मजारों को निशाना बनाया गया। कुश्तिया में एक सूफी दरगाह पर भीड़ ने हमला कर आगजनी की, जबकि सिलहट में उर्स समारोह के दौरान संगीत का विरोध करते हुए श्रद्धालुओं पर हमला किया गया। इसके अलावा ढाका, बरिशाल और चटगांव के कई सूफी स्थलों पर भी तोड़फोड़ और हिंसा की घटनाएं सामने आईं।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि, सूफी परंपरा से जुड़े कलाकार और बाउल गायक भी डर के माहौल में जी रहे हैं। कई कलाकारों का कहना है कि पहले जहां उन्हें नियमित सांस्कृतिक कार्यक्रम मिलते थे, अब ऐसे आयोजन लगभग बंद हो गए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि, लगातार हो रहे इन हमलों ने बांग्लादेश में धार्मिक सहिष्णुता और सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।