इंडोनेशिया का 1000 साल पुराना प्रम्बानन मंदिर, जिसकी दीवारों पर आज भी जीवंत है रामायण की कहानी

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नई दिल्ली। दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम आबादी वाले देशों में शामिल इंडोनेशिया में स्थित करीब 1000 वर्ष पुराना प्रम्बानन मंदिर भारत से गहरे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों का प्रतीक माना जाता है। इन दिनों यह मंदिर चर्चा में है क्योंकि भारत इसके जीर्णोद्धार में सहयोग करने जा रहा है। ऐसे में इस प्राचीन मंदिर का इतिहास और भारत से इसका संबंध एक बार फिर सुर्खियों में है।

प्रम्बानन मंदिर हिंदू धर्म के प्रमुख मंदिरों में से एक है, जहां ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवों की पूजा होती है। मंदिर परिसर में भगवान शिव का मुख्य मंदिर है, जबकि दक्षिण दिशा में भगवान विष्णु और उत्तर दिशा में भगवान ब्रह्मा का मंदिर स्थित है। इतिहासकारों के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण 9वीं शताब्दी में संजया वंश के राजा राकाई पिकाटन ने कराया था। इंडोनेशिया में इसे रोरो जोंगग्रंग के नाम से भी जाना जाता है, जिसका अर्थ है ‘पतली कुंवारी का मंदिर’।

यह मंदिर इंडोनेशिया के मध्य जावा प्रांत में जोगजकार्ता शहर से लगभग 17 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसकी वास्तुकला दक्षिण भारत की पल्लव और चोल शैली से प्रेरित मानी जाती है। ऊंचे शिखर, विशाल प्रांगण और वास्तुशास्त्र की मंडल अवधारणा इस मंदिर को अद्वितीय बनाती है। प्रम्बानन मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसकी दीवारों और प्रांगण पर उकेरी गई रामायण की विस्तृत कथाएं हैं। इन कलाकृतियों में भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण, हनुमान और रावण से जुड़े प्रसंगों को बेहद बारीकी से दर्शाया गया है, जिससे रामायण की कहानी को आसानी से समझा जा सकता है।

मंदिर के पास हर वर्ष मई से अक्टूबर के बीच प्रसिद्ध रामायण बैले का आयोजन भी किया जाता है। ओपेरा शैली में प्रस्तुत इस नाट्य मंचन में रामायण की कथा को जीवंत रूप से दिखाया जाता है। इस सांस्कृतिक आयोजन को देखने के लिए दुनिया भर से हजारों पर्यटक इंडोनेशिया पहुंचते हैं। प्रम्बानन मंदिर आज भी भारत और इंडोनेशिया के साझा सांस्कृतिक संबंधों, प्राचीन कला, वास्तुकला और धार्मिक विरासत का जीवंत प्रतीक माना जाता है।