क्या अब बदल जाएगी जंग की दिशा,रूस ने ईरान क्यों भेजा ‘प्रलय विमान’

Follow Us

नई दिल्ली। अमेरिका, ईरान और इस्राइल के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। इसी बीच रूस का एक खास विमान के ईरान पहुंचने की खबर सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, रूस ने अपना TU-214PU एयरबोर्न कमांड एयरक्राफ्ट तेहरान भेजा है।

यह कोई आम विमान नहीं है। इसे युद्ध या बड़े संकट के समय देश की कमान संभालने के लिए बनाया गया है। इसी वजह से इसे कई बार ‘डूम्सडे प्लेन’ यानी प्रलय का विमान भी कहा जाता है। रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि इस कदम से रूस ने दुनिया, खासकर अमेरिका को यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह ईरान के साथ खड़ा है। हालांकि रूस ने इस मिशन को लेकर आधिकारिक तौर पर ज्यादा जानकारी नहीं दी है।

आखिर क्या होता है ‘डूम्सडे प्लेन’ ?
जब किसी देश पर बड़ा हमला हो जाए, सरकार का मुख्यालय खतरे में आ जाए या युद्ध की स्थिति बन जाए, तब भी देश का शीर्ष नेतृत्व काम करता रहे। इसी मकसद से ऐसे विमान बनाए जाते हैं। इन विमानों के अंदर एक चलता-फिरता कमांड सेंटर होता है। यहां से राष्ट्रपति, रक्षा मंत्री और सेना के बड़े अधिकारी सुरक्षित तरीके से फैसले ले सकते हैं। सेना को आदेश दे सकते हैं और देशभर की सुरक्षा एजेंसियों से संपर्क बनाए रख सकते हैं। यही वजह है कि ऐसे विमानों को ‘डूम्सडे प्लेन’ कहा जाता है। यानी ऐसा विमान जो सबसे बड़े संकट में भी काम करता रहे।

TU-214PU की क्या हैं खासियतें?
यह विमान रूस के TU-214PU यात्री विमान का सैन्य संस्करण है। इसे खास तौर पर सरकारी और सैन्य कमान के लिए तैयार किया गया है।

  • विमान में बेहद सुरक्षित संचार प्रणाली लगी है।
  • यह हवा में रहते हुए सेना और सरकार के बीच संपर्क बनाए रख सकता है।
  • इसकी क्रूजिंग स्पीड करीब 850 किलोमीटर प्रति घंटा है।
  • यह एक बार में लगभग 6,500 किलोमीटर तक उड़ान भर सकता है।
  • जरूरत पड़ने पर इसे उड़ते हुए कमांड सेंटर की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

ईरान में इस विमान के पहुंचने का मतलब क्या है?
जानकारों का कहना है कि यह सिर्फ एक विमान की उड़ान नहीं है। इसके पीछे बड़ा रणनीतिक संदेश भी हो सकता है। अगर किसी देश में युद्ध जैसी स्थिति हो, तो ऐसे विमान से दोनों देशों के बीच सुरक्षित बातचीत हो सकती है। सैन्य रणनीति बनाई जा सकती है। खुफिया जानकारी साझा की जा सकती है। बड़े फैसले तेजी से लिए जा सकते हैं। इसी वजह से इस तैनाती को रूस और ईरान के मजबूत होते रिश्तों से जोड़कर देखा जा रहा है।

इस समय पश्चिम एशिया में हालात कैसे हैं?
पश्चिम एशिया में हालात अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों में ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य कार्रवाई और जवाबी हमलों के दावे किए गए हैं। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने भी अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है। वहीं अमेरिका भी क्षेत्र में अपनी सैन्य गतिविधियां जारी रखे हुए है।

अमेरिका सहित दुनिया को क्या संदेश?
अगर रूस और ईरान के बीच सैन्य सहयोग और मजबूत होता है, तो अमेरिका के लिए यह चिंता की बात हो सकती है। हालांकि सिर्फ एक विमान के ईरान पहुंचने से यह नहीं कहा जा सकता कि युद्ध की दिशा बदल जाएगी। लेकिन इससे यह जरूर पता चलता है कि रूस इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर अपने सहयोगी देश का समर्थन करने का संकेत दे रहा है।

इस विमान की तैनाती को केवल सैन्य कदम नहीं माना जा रहा है। इसे एक राजनीतिक और रणनीतिक संदेश भी माना जा रहा है। रूस यह दिखाना चाहता है कि पश्चिम एशिया में उसकी मौजूदगी बनी हुई है और वह ईरान के साथ अपने रिश्तों को कमजोर नहीं होने देना चाहता। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाले दिनों में अमेरिका, ईरान और रूस के बीच हालात किस दिशा में बढ़ते हैं और क्या यह तनाव किसी बड़े संघर्ष का रूप लेता है।