पेपर लीक बिल पर सपा का हमला: ‘सिर्फ सख्त कानून नहीं, युवाओं पर दर्ज मुकदमे भी वापस हों’

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नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र में केंद्र सरकार आज पब्लिक एग्जामिनेशंस (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पेश करने जा रही है। इस बिल का उद्देश्य पेपर लीक और परीक्षा में होने वाली गड़बड़ियों पर रोक लगाना है। हालांकि, समाजवादी पार्टी (सपा) ने सरकार के इस कदम पर सवाल उठाते हुए कहा है कि केवल कानून कड़ा करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। सपा अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार को युवाओं की आवाज सुननी चाहिए और आंदोलनों के दौरान छात्रों व युवाओं पर दर्ज मुकदमे वापस लेने चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा व्यवस्था में सुधार के साथ-साथ सरकार को जवाबदेही भी तय करनी होगी।

सपा सांसद रामगोपाल यादव ने कहा कि कठोर सजा का प्रावधान अकेले अपराध रोकने के लिए पर्याप्त नहीं है। उन्होंने मांग की कि पेपर लीक रोकने के लिए प्रश्नपत्र तैयार करने, छपाई और वितरण की पूरी प्रक्रिया को सुरक्षित बनाया जाए। उन्होंने डिजिटल व्यवस्था में सुरक्षा खामियों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि तकनीकी निगरानी और मजबूत सिस्टम के बिना केवल नया कानून प्रभावी साबित नहीं होगा। वहीं, सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि सरकार को यह कदम पहले उठाना चाहिए था, ताकि पेपर लीक से परेशान युवाओं को नुकसान न उठाना पड़ता। सपा ने परीक्षा सुधार, पारदर्शिता और युवाओं के हितों को लेकर आगे भी आवाज उठाने की बात कही है।