नई दिल्ली। नीट पेपर लीक मामले के विरोध में 26 दिनों तक अनशन करने वाले पर्यावरणविद और सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को सोमवार को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद सोनम वांगचुक अपनी पत्नी गीतांजली अंगमो के साथ दिल्ली पहुंचे, जहां उन्होंने राजघाट जाकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। सोनम वांगचुक ने अपने राजघाट दौरे की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए। उन्होंने पोस्ट में लिखा, “राजघाट का दौरा किया… घर लौटने से पहले।” पोस्ट के साथ उन्होंने राजघाट की कुछ तस्वीरें भी साझा कीं, जिसमें वह महात्मा गांधी की समाधि पर श्रद्धांजलि अर्पित करते नजर आए।
बताया जा रहा है कि लंबे समय तक अनशन के कारण उनकी तबीयत बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। चिकित्सकों की निगरानी में इलाज के बाद उनकी स्थिति में सुधार हुआ और सोमवार को उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। सोनम वांगचुक ने नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक और इससे जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी आवाज उठाई थी। इसी मांग को लेकर उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल शुरू की थी। उनका अनशन 26 दिनों तक चला। इस दौरान उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
वांगचुक लंबे समय से शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पारदर्शिता और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर सक्रिय रहे हैं। उन्होंने नीट परीक्षा से जुड़े मामलों में जिम्मेदारी तय करने और व्यवस्था में सुधार की मांग की थी। राजघाट पहुंचने के बाद उन्होंने महात्मा गांधी के विचारों और शांतिपूर्ण आंदोलन के रास्ते को लेकर भी अपनी बात रखी। इससे पहले उन्होंने कहा था कि गांधीजी का दिखाया हुआ मार्ग आज भी प्रासंगिक है और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना लोकतांत्रिक अधिकार का हिस्सा है।
दिल्ली भाजपा सोनम वांगचुक के अनशन को लेकर देशभर में चर्चा हुई थी। उनके समर्थकों ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने की मांग का समर्थन किया था। वहीं, सरकार की ओर से भी उनकी मांगों को लेकर बातचीत और आश्वासन दिए जाने की बात सामने आई थी। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद वांगचुक ने एक बार फिर शिक्षा और सामाजिक मुद्दों पर अपनी सक्रियता जारी रखने के संकेत दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों से अपील की थी कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों के अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए। राजघाट यात्रा के बाद सोनम वांगचुक अपने घर लौट गए। अब उनके आगे के कार्यक्रमों और शिक्षा सुधार से जुड़े मुद्दों पर उनकी अगली रणनीति पर लोगों की नजर बनी हुई है।
