नई दिल्ली। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इसे नरेंद्र मोदी सरकार के 12 साल के कार्यकाल में किसी केंद्रीय मंत्री का पहला इस्तीफा बताया जा रहा है। CJP आंदोलन से जुड़े लोग इसे छात्रों और युवाओं के संघर्ष की जीत बता रहे हैं। मोदी सरकार के कार्यकाल में इससे पहले CAA विरोधी आंदोलन और किसान आंदोलन जैसे बड़े जनआंदोलन हुए थे, लेकिन इन आंदोलनों के बावजूद किसी केंद्रीय मंत्री को अपने पद से इस्तीफा नहीं देना पड़ा था। वहीं, NEET पेपर लीक विवाद को लेकर शुरू हुआ CJP आंदोलन लगातार बड़ा मुद्दा बनता गया।
NEET विवाद के बाद छात्रों और अभिभावकों में नाराजगी बढ़ी। जंतर-मंतर पर लंबे समय तक चले प्रदर्शन, विपक्ष के विरोध और आंदोलनकारियों की मांगों के बीच मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया।CJP प्रमुख अभिजीत दिपके ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को आंदोलन की जीत बताया। उन्होंने कहा कि छात्रों की आवाज और लोकतांत्रिक संघर्ष के कारण सरकार को फैसला लेना पड़ा। हालांकि संगठन ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार, प्रभावित छात्रों के परिवारों को मुआवजा और प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेने जैसी मांगें भी दोहराई हैं।
CJP आंदोलन की शुरुआत NEET पेपर लीक विवाद के बाद हुई थी। संगठन ने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर समेत कई जगहों पर प्रदर्शन किए। आंदोलन के दौरान सोनम वांगचुक के भूख हड़ताल से जुड़ने के बाद भी यह मामला सुर्खियों में रहा। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब राजनीतिक हलकों में इस फैसले के असर और सरकार की आगे की रणनीति को लेकर चर्चा तेज हो गई है।


