नई दिल्ली में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के बीच हुई एक महत्वपूर्ण बैठक ने बस्तर के भविष्य की नई पटकथा लिख दी है। मुख्यमंत्री साय ने गृहमंत्री को जानकारी दी कि बस्तर अब केवल गोलियों और संघर्ष के लिए नहीं, बल्कि अपनी ‘स्वस्थ बस्तर’ और ‘अग्रणी बस्तर’ जैसी क्रांतिकारी योजनाओं के लिए पहचाना जा रहा है। बैठक के दौरान उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा भी मौजूद रहे, जहाँ बस्तर के दुर्गम इलाकों में पहुंच रही स्वास्थ्य सेवाओं और बुनियादी सुविधाओं के रोडमैप पर विस्तार से चर्चा की गई।
मुख्यमंत्री ने गृहमंत्री को बताया कि ‘मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान’ के तहत मात्र एक महीने के भीतर 21.86 लाख लोगों की स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है और उनके डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल तैयार किए गए हैं। जिन रास्तों पर कभी एम्बुलेंस का जाना नामुमकिन था, वहां आज डॉक्टर और दवाइयां पैदल चलकर पहुंच रही हैं। यही नहीं, बस्तर के पुराने सुरक्षा कैंप अब अपनी पुरानी पहचान बदलकर ‘जन सुविधा केंद्र’ बन रहे हैं। इन केंद्रों पर ग्रामीणों को बैंकिंग, राशन, शिक्षा और सरकारी योजनाओं का लाभ एक ही छत के नीचे मिल रहा है, जिससे आदिवासियों का प्रशासन पर भरोसा बढ़ा है।

जगदलपुर में नए सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की शुरुआत के साथ अब बस्तरवासियों को महंगे इलाज के लिए रायपुर या विशाखापट्टनम भागने की जरूरत नहीं होगी। ‘बस्तर मुन्ने’ (अग्रणी बस्तर) अभियान के जरिए 31 महत्वपूर्ण योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जा रहा है। साय ने गृहमंत्री को भरोसा दिलाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में बस्तर तेजी से मुख्यधारा में लौट रहा है। अमित शाह ने इन प्रयासों की सराहना करते हुए बस्तर के विकास में केंद्र के पूर्ण सहयोग की प्रतिबद्धता दोहराई। गौरतलब है कि अमित शाह 18-19 मई को खुद बस्तर का दौरा कर जमीनी हकीकत का जायजा ले सकते हैं।
