रायपुर। बच्चों को उनके अधिकारों और सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए जिले के 21 विद्यालयों में ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ के तहत विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस दौरान 42 न्यायाधीशों ने विद्यार्थियों से संवाद कर उन्हें बाल संरक्षण कानूनों, व्यक्तिगत सुरक्षा, ऑनलाइन सतर्कता और निःशुल्क कानूनी सहायता की जानकारी दी। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के तत्वावधान में 10 अक्टूबर 2026 से शुरू हुए इस अभियान का उद्देश्य बच्चों को उनके अधिकारों और मदद पाने के उपलब्ध माध्यमों से परिचित कराना है। विद्यार्थियों को बताया जा रहा है कि असुरक्षा या शोषण की स्थिति में किससे संपर्क करना चाहिए, शिकायत कैसे दर्ज करानी है और निःशुल्क विधिक सहायता किस तरह प्राप्त की जा सकती है।
रायपुर और गरियाबंद जिले में अभियान के पहले चरण के तहत 26 से 31 अक्टूबर तक विद्यालयों में जागरूकता गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इसके लिए जिला शिक्षा अधिकारी, बाल कल्याण पुलिस अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग और साइबर क्राइम विभाग को शामिल करते हुए जिला स्तरीय समन्वय समिति बनाई गई है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं प्रधान जिला न्यायाधीश बलराम प्रसाद वर्मा के निर्देश पर चयनित स्कूलों में कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं।
इन कार्यक्रमों में ‘मेरा बचपन, मेरा अधिकार’, ‘कानून जानो, बचपन बचाओ’, ‘सुरक्षित क्लिक, सुरक्षित बचपन’, ‘बोलो, बताओ, बचाओ’ और ‘न बाल विवाह, न बाल शोषण’ जैसे विषयों पर बच्चों को जागरूक किया जा रहा है। महिला एवं बाल विकास विभाग के पॉक्सो सपोर्ट पर्सन, किशोर न्याय बोर्ड और बाल कल्याण समिति के सदस्य तथा बाल मनोविज्ञान विशेषज्ञ भी विद्यार्थियों से संवाद कर रहे हैं।
इसके साथ ही आसपास के विधि महाविद्यालयों के शिक्षक और विद्यार्थी नुक्कड़ नाटक, प्रश्नोत्तरी, चित्रकला और पेंटिंग जैसी गतिविधियों के जरिए अभियान में योगदान दे रहे हैं। अभियान का उद्देश्य बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करना और उन्हें अपने अधिकारों व सहायता के तरीकों की जानकारी देना है। अभियान की अवधि समाप्त होने के बाद भी विद्यालयों में बाल संरक्षण और बच्चों के बौद्धिक एवं मानसिक विकास से जुड़ी जागरूकता गतिविधियां जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

