शेयर बाजार में भारी गिरावट: सेंसेक्स 601 अंक टूटा और निफ्टी 22,600 पर पहुंचा

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नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को शुरुआती कारोबार के दौरान गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स 601.14 अंक गिरकर 72,997.55 पर आ गया। वहीं, निफ्टी 146 अंक टूटकर 22,604.80 पर पहुंच गया। प्री मार्केट में सुबह 9:03 बजे सेंसेक्स 340.35 अंक गिरकर 73,258.32 पर था। निफ्टी भी 85.21 अंक की गिरावट के साथ 22,664.55 पर कारोबार कर रहा था।

सप्ताह के तीसरे कारोबारी दिन, बुधवार (28 अक्तूबर 2026) को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। सूचना प्रौद्योगिकी (IT) क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों के शेयरों में बिकवाली, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आगामी ब्याज दर फैसले से पहले निवेशकों की सतर्कता के कारण घरेलू सूचकांकों में तेज गिरावट आई। जहां वैश्विक मोर्चे पर भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा कीमतों का दबाव बाजार की धारणा को प्रभावित कर रहा है, वहीं घरेलू स्तर पर कॉरपोरेट नतीजों और जिओ प्लेटफॉर्म्स की लिस्टिंग पर भी दलाल स्ट्रीट की पैनी नजर बनी हुई है।

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शुरुआती कारोबार में शेयर बाजार में कितनी बड़ी गिरावट दर्ज की गई?
सप्ताह के मध्य में सुबह के शुरुआती सत्र में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला प्रमुख सूचकांक बीएसई सेंसेक्स 601.14 अंक यानी 0.82 प्रतिशत टूटकर 72,997.55 के स्तर पर आ गया। इसी तरह, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का 50 शेयरों वाला मानक सूचकांक एनएसई निफ्टी 146 अंक की बड़ी गिरावट के साथ 22,604.80 के स्तर पर खिसक गया।

इससे एक दिन पहले, मंगलवार को सेंसेक्स महज 8.08 अंक घटकर 73,598.67 पर और निफ्टी 3.45 अंक फिसलकर 22,749.75 के स्तर पर बंद हुआ था। शुरुआती कारोबार में 600 से अधिक अंकों का यह गोता पिछले सत्र की सुस्ती के बाद बाजार पर बढ़ते बिकवाली के दबाव को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

बिकवाली की मुख्य वजह क्या रही और कौन-से शेयर लुढ़के?
सेंसेक्स के 30 प्रमुख ब्लू-चिप शेयरों में से आईटी क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों में सबसे अधिक बिकवाली देखने को मिली। इंफोसिस, एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) गिरावट की अगुवाई करने वाले प्रमुख शेयरों में शामिल रहे। इनके अलावा, एफएमसीजी दिग्गज आईटीसी (ITC) और एशियन पेंट्स के शेयरों पर भी बिकवाली का भारी दबाव देखा गया।

विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच आईटी कंपनियों के आय दृष्टिकोण को लेकर चिंताएं और विदेशी बाजारों से मिलने वाले सतर्क संकेतों ने इन शेयरों में मुनाफावसूली की रफ्तार बढ़ाई है।

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वैश्विक भू-राजनीति से बाजार पर क्या असर पड़ रहा है?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी ने भारतीय अर्थव्यवस्था और इक्विटी बाजारों के लिए चिंताएं बढ़ा दी हैं। वैश्विक मानक ब्रेंट क्रूड 1.36 प्रतिशत चढ़कर 115.4 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है, जबकि डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड भी 100 से 101 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में बना हुआ है।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी.के. विजयकुमार के अनुसार, “अमेरिका में मध्यवधि चुनावों के बाद ईरान पर संभावित नए हमलों की रिपोर्टों के कारण ब्रेंट क्रूड फिर से 115 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजारों के लिए प्रतिकूल खबर है।” इसके अलावा, एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने बताया कि यूएस फेड के नीतिगत फैसले से पहले निवेशकों की सतर्कता और कच्चे तेल के कारण लागत दबाव बाजार पर हावी है।

किन दिग्गज कंपनियों और शेयरों ने दी मजबूती?
चौतरफा बिकवाली के इस माहौल के बीच इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन क्षेत्र की दिग्गज कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (L&T) के शेयर में 4 प्रतिशत से अधिक की शानदार तेजी दर्ज की गई। कंपनी द्वारा सितंबर 2026 को समाप्त दूसरी तिमाही में समेकित शुद्ध लाभ 32.5 प्रतिशत बढ़कर ₹5,202.10 करोड़ रहने की रिपोर्ट के बाद शेयर में यह उछाल आया, जिसे राजस्व में हुई वृद्धि से बल मिला।

इसके अतिरिक्त, बैंकिंग क्षेत्र के दिग्गजों- स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और एक्सिस बैंक- के शेयरों ने भी मंदी के बीच बढ़त हासिल कर बाजार को सहारा देने का प्रयास किया। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने भी मंगलवार को ₹4,240.39 करोड़ के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की थी।

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बाजार की दिशा किन वैश्विक और घरेलू कारकों से तय होगी?
वैश्विक बाजारों की बात करें तो एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी (कोस्पी) 6.11 प्रतिशत के बड़े उछाल के साथ कारोबार कर रहा था, जबकि जापान का निकेई 225, शंघाई कंपोजिट और हांगकांग का हैंगसेंग भी बढ़त में रहे। मंगलवार को अमेरिकी बाजार भी मजबूती के साथ बंद हुए थे।

हालांकि, भारतीय बाजारों का मुख्य ध्यान अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आगामी ब्याज दर निर्णय, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और घरेलू मोर्चे पर जिओ प्लेटफॉर्म्स के शेयर की लिस्टिंग पर टिका रहेगा। भारतीय शेयर बाजार में 601 अंकों की गिरावट यह दर्शाती है कि 115 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना कच्चा तेल और वैश्विक केंद्रीय बैंकों की नीतियां अल्पावधि में बाजार पर हावी रहेंगी।