बैरियर में थमे पहिये और कमार महिला को खुले मैदान मोबाइल की रोशनी में कराना पड़ा प्रसव,मामले में आदिवासी समाज हुए उग्र
गरियाबंद (मैनपुर)। उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में बैरियर की पाबंदी एक गर्भवती महिला के लिए जानलेवा जैसे साबित हुई थी प्रसव पीड़ा से तड़प रही विशेष पिछड़ी जनजाति कमार महिला को खुले मैदान में ही बच्चे को जन्म देना पड़ा अब इस घटना के बाद आदिवासी मूल निवासी समाज में भारी आक्रोश है। ज्ञात हो कि जल जंगल जमीन बचाओ संघर्ष समिति के अनुसार दिनांक 02 नवंबर 2026 सोमवार की दरम्यानी रात करीब 2 बजे रायपुर से देवभोग जा रही यात्री बस में सवार ग्राम रसेला तहसील छुरा निवासी संतोषी सोरी को तौरेंगा बैरियर मे फंँसी सवारी बस मे तेज प्रसव पीड़ा शुरू हुई बैरियर बंद था वहां एम्बुलेंस थी न डॉक्टर न रोशनी और शौचालय था मजबूरन बस में सवार लोगों ने मोबाइल की रोशनी में खुले मैदान में ही महिला का प्रसव कराया।
बस में मौजूद यात्रियों और परिचालक ने तत्काल मदद की पहल की और महतारी एक्सप्रेस को सूचना दी एंबुलेंस मौके पर पहुंँची और जज्जा बच्चा को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मैनपुर ले जाया गया जल जंगल जमीन बचाओ संघर्ष समिति सीतानदी उदंती (128 ग्राम) ने इस घटना की घोर निंदा की है। समिति का कहना है कि यह सिर्फ एक प्रसव नहीं, बल्कि 128 ग्राम की महा ग्राम सभा के आदेश का खुला उल्लंघन है। महा ग्राम सभा पहले ही प्रशासन को आदेश परिपालन का ज्ञापन दे चुकी है।लेकिन परिपालन नहीं हुआ।
समिति के अध्यक्ष अधिवक्ता सिरधन सोम ने कहा हम आदिवासी हजारों साल से इस जंगल में रह रहे हैं।हमने कभी टाइगर को नुकसान नहीं पहुंँचाया। लेकिन आज टाइगर के नाम पर हमारी बहन बेटियों को खुले मैदान में बच्चा जन्म देना पड़ रहा है। ये कैसा विकास है।जंगल जमीन बचाओ संघर्ष समिति के संरक्षक और जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम ने कहा ये घटना पेसा कानून का अपमान है यह सिर्फ एक महिला का प्रसव नहीं है। ये 128 ग्राम की महा ग्राम सभा के आदेश का उल्लंघन है पेसा कानून में ग्राम सभा को सबसे ऊपर रखा गया है।
महा ग्राम सभा ने आदेश परिपालन का ज्ञापन पहले ही सबको दे दिया था फिर भी प्रशासन ने नहीं माना इसका नतीजा है। कि संतोषी सोरी को बैरियर पर रोका गया। यह सरासर जीने का अधिकार कानून का उल्लंघन है। मां और बच्चे को कुछ हो जाता तो जिम्मेदार कौन होता हम 60 दिन का समय दिए हैं अगर आदेश का परिपालन नहीं हुआ तो हम पेसा और पांचवी अनुसूची के तहत न्यायालय तक जाएंगे ग्राम सभा से बड़ा कोई अधिकारी नहीं है। वही समिति के संरक्षक और जिला पंचायत सदस्य लोकेश्वरी नेताम ने कहा कि एक मां का दर्द समझो खुले मैदान में प्रसव कैसा लगता है।
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एक महिला होने के नाते ये घटना मुझे अंदर तक हिला गई। संतोषी सोरी को जिस हालत में खुले मैदान में प्रसव कराना पड़ा कोई माँ ही समझ सकती है। मोबाइल की रोशनी में बिना डॉक्टर बिना कपड़े के महिला ने बच्चों को जन्म दिया क्या यही सरकार का बेटी बचाओ है। क्या कमार समाज की महिला की इज्जत नहीं है। बैरियर पर महिला के लिए शौचालय रोशनी और स्वास्थ्य सुविधा होनी चाहिए हमारी बहनों को ऐसी अपमानित नहीं किया जा सकता। हम हिंसा नहीं चाहते हैं,हम सम्मान चाहते हैं।
बैरियर पर ताला नहीं इंसानियत चाहिए संतोषी सोरी हमारी बहन हैं। उसको प्रसव पीड़ा हो रही थी लेकिन बैरियर पर कोई व्यवस्था नहीं था यह टाइगर रिजर्व के नियम है या आदिवासियों को मारने का नियम। 128 ग्राम की महा ग्राम सभा ने पहले ही कहा था रात में एंबुलेंस और सवारी गाड़ी को मत रोको प्रशासन ने नहीं सुना आज हमारी बहन को खुले मैदान में बच्चे को जन्म देना पड़ा प्रेस विज्ञप्ति में अर्जुन नायक ने कहा। दैनिक राम मंडावी ने कहा आज टाइगर के नाम पर हमें ही जंगल में कैद कर दिया गया है रात में हमारी बस रोक दी जाती है। एंबुलेंस रोक दी जाती है।
बीमार आदमी तड़पता रहता है संतोषी सोरी की घटना ने सबको बता दिया कि बैरियर की पाबंदी कितनी जानलेवा है। हम विकास के खिलाफ नहीं है हम चाहते हैं रात में आने जाने की छूट मिले हर बैरियर पर स्वास्थ्य केंद्र बने हम लड़ाई नहीं चाहते हम ग्राम सभा के आदेश का परिपालन चाहते हैं। अगर प्रशासन नहीं सुनेगा तो 128 गांव एक साथ खड़़े रहेंगे। समिति के सदस्यों ने मांग किया है कि रात में एम्बुलेंस,सवारी बस, प्रसूता वाली गाड़ी और सामाजिक पारिवारिक कार्यों के लिए आने जाने वाली गाडिय़ों को न रोका जाए।
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हर बैरियर पर आपातकालीन स्वास्थ्य केंद्र बनाया जाये। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि 60 दिन के अंदर महा ग्राम सभा के आदेश का परिपालन नहीं हुआ तो 128 ग्राम की महा ग्राम सभा संबंधित अधिकारी को ग्राम सभा का असहयोगी घोषित कर पेशा अधिनियम एवं संविधान की 5वीं अनुसूची के तहत न्यायालय तक कार्यवाही के लिए जाएगी। वही यूएसटीआर के उपसंचालक वरुण जैन ने बताया कि यात्री बसों को भी आपातकालीन सेवा के दायरे में शामिल करने के लिए पत्राचार किया जाएगा। जर्जर पड़े यात्री प्रतिक्षालियों की मरम्मत कर उन्हें सुविधाजनक और उपयोगी बनाने की दिशा में भी पहल करने पर विचार किया जा रहा है।
