नई दिल्ली। इंदौर के चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में आरोपी सोनम रघुवंशी की जमानत रद्द करने की याचिका पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने मेघालय सरकार को सोनम रघुवंशी की गिरफ्तारी से जुड़े सभी दस्तावेज प्रस्तुत करने का निर्देश दिया और अगली सुनवाई के लिए 14 जुलाई की तारीख तय की। सुनवाई के दौरान मेघालय सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में पक्ष रखते हुए कहा कि यह एक बेहद गंभीर और सुनियोजित हत्या का मामला है। उन्होंने दलील दी कि हाईकोर्ट ने केवल एक टाइपिंग त्रुटि के आधार पर जमानत बरकरार रखी, जो कानून की गलत व्याख्या है।
तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि गिरफ्तारी के समय आरोपी को उसके खिलाफ कार्रवाई के आधार बताए गए थे। हालांकि, गिरफ्तारी दस्तावेज में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103 की जगह गलती से धारा 403 दर्ज हो गई थी। उनका कहना था कि यह केवल टाइपिंग की त्रुटि थी, जिसका लाभ आरोपी को नहीं मिलना चाहिए। दरअसल, मेघालय हाईकोर्ट ने इससे पहले सोनम रघुवंशी की जमानत इस आधार पर बरकरार रखी थी कि पुलिस गिरफ्तारी के उचित लिखित आधार उपलब्ध कराने में विफल रही। इसी आदेश को चुनौती देते हुए मेघालय सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची है और जमानत रद्द करने की मांग की है।
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की दलीलें सुनने के बाद कहा कि वह पूरे मामले पर विस्तार से विचार करेगा। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि यदि आवश्यक हुआ तो इस कानूनी प्रश्न को बड़ी पीठ के समक्ष भी भेजा जा सकता है। साथ ही कोर्ट ने मेघालय सरकार को गिरफ्तारी से संबंधित सभी रिकॉर्ड और दस्तावेज अगली सुनवाई तक पेश करने के निर्देश दिए। इससे पहले सोनम रघुवंशी ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में खुद को निर्दोष बताया था। उन्होंने दावा किया कि उन्हें झूठे तरीके से मामले में फंसाया गया है और पुलिस की पूरी कहानी केवल परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है। सोनम का कहना है कि उनके खिलाफ कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य मौजूद नहीं है। अब इस मामले में 14 जुलाई को होने वाली सुनवाई अहम मानी जा रही है, जहां सुप्रीम कोर्ट गिरफ्तारी प्रक्रिया, जमानत आदेश और कानूनी प्रावधानों पर विस्तृत सुनवाई करेगा। इस सुनवाई के बाद यह तय हो सकेगा कि सोनम रघुवंशी की जमानत बरकरार रहेगी या उसे रद्द किया जाएगा।
