नई दिल्ली । कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर आरोप लगाए। नई दिल्ली में आयोजित प्रेस वार्ता में राहुल गांधी ने दावा किया कि देश में लोकसभा से लेकर विधानसभा तक हुए चुनावों में धांधली हुई है। उन्होंने ज्ञानेश कुमार पर लोकतांत्रिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाते हुए कहा कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
राहुल गांधी ने दिसंबर 2023 में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित कानून का उल्लेख करते हुए कहा कि इस कानून के बाद निर्वाचन आयुक्तों को व्यापक कानूनी संरक्षण मिला। उन्होंने 7 फरवरी 2025 को महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव को लेकर की गई अपनी प्रेस वार्ता और बाद में निकाली गई ‘मतदाता अधिकार यात्रा का भी जिक्र किया।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संरक्षण प्राप्त है। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार शिक्षित अधिकारी हैं और उन्हें यह समझना चाहिए कि उनके फैसलों का लोकतांत्रिक व्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।
राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस लोकतंत्र को कमजोर होते हुए चुपचाप नहीं देखेगी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की भूमिका की जांच की आवश्यकता जताई। हालांकि, ये सभी आरोप राहुल गांधी के राजनीतिक दावे हैं और उनकी स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है। राहुल गांधी ने निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी मतदाताओं के मताधिकार की रक्षा करना बताया। उन्होंने दावा किया कि देश में हुए सभी प्रकार के चुनावों में धांधली की गई है। उन्होंने निर्वाचन आयोग के भीतर भी मुख्य चुनाव आयुक्त के फैसलों को लेकर सवाल उठने का दावा किया।
भय-भ्रम की ब्रांड एंबेसडर कांग्रेस पार्टी, एसआईआर को लेकर भ्रम फैला बखेड़ा खड़ा कर रही
राहुल गांधी ने कहा कि यदि मतों की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं तो उसका असर आगे बनने वाली सरकारों, कानूनों और संवैधानिक संस्थाओं पर भी पड़ता है। उनके अनुसार, ”मत की चोरी से कानून की चोरी और फिर संस्थाओं की चोरी की स्थिति पैदा होती है। राहुल गांधी ने कहा कि किसी नेता की लोकप्रियता और सरकार के कामकाज का आकलन किया जा सकता है, लेकिन चुनाव परिणामों में सत्ता विरोधी रुझान क्यों दिखाई नहीं देता, यह उनके लिए बड़ा सवाल था। उन्होंने दावा किया कि अब उन्हें इस सवाल का जवाब मिल गया है।
उन्होंने कहा कि मत से संविधान को शक्ति मिलती है, संविधान से कानून बनते हैं और कानूनों के आधार पर संस्थाएं काम करती हैं। ऐसे में यदि मताधिकार की प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े हो जाएं तो संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका भी प्रभावित होती है। राहुल गांधी की प्रेस वार्ता ऐसे समय हुई है जब निर्वाचन आयोग के भीतर दो निर्वाचन आयुक्तों द्वारा विभिन्न फैसलों पर आपत्ति जताए जाने से संबंधित रिपोर्ट सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कई मामलों में आपत्तियां दर्ज की थीं, जिनमें मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े विषय भी शामिल थे।
राहुल गांधी ने इन रिपोर्टों को निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर अपने सवालों के समर्थन में रखा। वहीं, चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े राहुल गांधी के पूर्व आरोपों को निर्वाचन आयोग पहले खारिज करते हुए उन्हें आधारहीन और गलत बता चुका है। प्रेस वार्ता में राहुल गांधी ने अपने आरोपों को दोहराते हुए कहा कि कांग्रेस लोकतांत्रिक संस्थाओं और मताधिकार से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी आवाज उठाती रहेगी।
रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त डॉक्टर सुखबीर सिंह संधू और डॉक्टर विवेक जोशी ने 10 महीनों में 14 बार अपनी आपत्तियां चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के समक्ष दर्ज कराई थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने जिन मुद्दों पर आपत्ति जताई उनमें नए मतदाताओं का पंजीयन, मतदाता सूची से नाम हटाना और जोडऩा और एसआईआर प्रक्रिया में मतदाता का नाम वापस जोडऩे के आदेशों के खिलाफ अपील करना जैसै मुद्दे शामिल थे।
