नई दिल्ली। पैलेट गन के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग को लेकर मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सोमवार को दायर याचिका में याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि 20 जुलाई को दिल्ली में हुए ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल से कई लोग घायल हुए। याचिकाकर्ताओं में यशोवर्धन आजाद, प्रशांत कुमार और शेख इरशाद मंसूरी शामिल हैं। इनमें 25 वर्षीय शेख इरशाद मंसूरी की मेडिकल रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें उनके शरीर से धातु के कई कण निकाले जाने का उल्लेख किया गया है।
लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज की मेडिको-लीगल केस (MLC) रिपोर्ट के अनुसार, सर्जरी के दौरान मरीज के सिर, गर्दन, चेहरे और कंधे से छोटे धातु के कण निकाले गए। रिपोर्ट में बताया गया कि दाएं चेहरे की हड्डी, गर्दन, कंधे और माथे के पास से करीब 2 मिमी आकार के कण बरामद हुए। नेत्र विभाग की रिपोर्ट में बाईं आंख और निचली पलक से भी विदेशी कण निकाले जाने की जानकारी दी गई है। मंसूरी का दावा है कि, कार्रवाई के दौरान RAF की ओर से पैलेट गन चलाई गई, जिससे वह घायल हुए। वहीं, सुरक्षा एजेंसियों की ओर से कहा गया है कि, कार्रवाई के दौरान निर्धारित दंगा नियंत्रण प्रक्रिया और नियमों का पालन किया गया। अब सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर आगे सुनवाई होगी।
