पद्मश्री डॉ. बशीर बद्र का निधन, 91 साल की उम्र में ली अंतिम सांस

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भोपाल। प्रसिद्ध उर्दू शायर, आधुनिक गजल के उस्ताद और पद्मश्री से सम्मानित डॉ. बशीर बद्र का लंबी बीमारी के बाद भोपाल में 91 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके इंतकाल से उर्दू शायरी के एक सुनहरे दौर का अंत हो गया है। डॉ. बद्र एक जमाने में मेरठ के साहित्यिक आयोजनों की शान हुआ करते थे। वे मेरठ कॉलेज के उर्दू विभाग में प्रोफेसर भी थे और छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय थे। उन्होंने देश-विदेश के मुशायरों में अपनी शायरी से खूब वाहवाही बटौरी। 80 के दशक तक वे देश के बड़े शायरों में शुमार हो चुके थे।

लेकिन वर्ष 1987 के भीषण दंगों में जब दंगाइयों ने मेरठ स्थित उनके आवास विकास कॉलोनी के एमआईजी मकान को भी नहीं बख्शा, तब उन्होंने हमेशा के लिए अपने शहर मेरठ को छोड़ दिया। इसके बाद वे भोपाल आ गए और अपनी अंतिम सांस तक यहीं रहे। हालांकि, मेरठ हमेशा उनके दिल में बसा रहा, क्योंकि यह शहर उनकी पहचान का एक अहम हिस्सा था।

उनकी शायरी ने मोहब्बत, तन्हाई, इंतज़ार और जि़ंदगी के गहरे जख़्मों को खूबसूरत शब्दों में पिरोया। उनकी भावनाएं और उनके शेर पीढिय़ों के दिलों में हमेशा जिंदा रहने वाले है। अपने शहर मेरठ से रुखसत होते हुए, उन्होंने उसके बदलते मिजाज पर एक शेर कहा था जो काफी चर्चित हुआ और उनकी दूरदृष्टि को दर्शाता है। उर्दू शायरी ने अपनी सबसे प्यारी आवाजों में से एक को खो दिया है।