नौतपा 2026: चिलचिलाती धूप में छुपा है समृद्धि का राज, जानें सूर्य उपासना और महादान का यह विशेष महत्व

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साल के सबसे गर्म 9 दिन यानी ‘नौतपा’ की शुरुआत हो चुकी है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र में कदम रखते हैं, तो पृथ्वी पर उनकी किरणें सीधे और लंबवत पड़ती हैं। आगामी 2 जून तक चलने वाले इस काल में पारा अपने चरम पर होगा, लेकिन सनातन परंपरा में इसे केवल चिलचिलाती धूप नहीं, बल्कि तप, संयम और आत्मशुद्धि का महाकाल माना गया है। धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों ही दृष्टिकोण से इस तपन का अपना एक विशेष महत्व है।

मान्यता है कि, नौतपा में सूर्य देव जितना अधिक तपेंगे, आने वाले समय में मानसून उतना ही झूमकर बरसेगा। किसानों के लिए यह प्राकृतिक चक्र किसी वरदान से कम नहीं है, क्योंकि यह भीषण गर्मी खेतों की मिट्टी को शुद्ध करती है और आगामी फसलों को नुकसान पहुँचाने वाले हानिकारक कीटों व जीवों को स्वतः नष्ट कर देती है। यही वजह है कि, इस तपन को प्रकृति के संतुलन के लिए बेहद जरूरी माना जाता है।

इस भीषण गर्मी के बीच समाज में शीतलता और सेवा भाव जगाने के लिए दान-पुण्य की परंपरा है। नौतपा के दौरान पवित्र नदियों में स्नान कर पितरों का तर्पण करने से विशेष पुण्य मिलता है। इन दिनों जरूरतमंदों को पानी से भरा मिट्टी का घड़ा, सत्तू, छाता, पंखा और मौसमी फल दान करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इसके साथ ही, प्रतिदिन सुबह सूर्य देव को अर्घ्य देने और सात्विक भोजन अपनाने से शरीर में सकारात्मक ऊर्जा और आत्मविश्वास का संचार होता है।