सरगुजा में विवेचना कार्यशाला आयोजित, जजों ने पुलिस अधिकारियों को नए कानूनों और गुणवत्तापूर्ण जांच के दिए निर्देश

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सरगुजा। नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन और अपराधों की गुणवत्तापूर्ण विवेचना सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सरगुजा पुलिस द्वारा पुलिस कोऑर्डिनेशन सेंटर में एक दिवसीय विवेचना कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में जिला एवं सत्र न्यायाधीश शक्ति सिंह राजपूत, डीआईजी एवं एसएसपी राजेश अग्रवाल, प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश ममता पटेल, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पल्लव रघुवंशी तथा प्रधान मजिस्ट्रेट कल्पना भगत की उपस्थिति रही।

कार्यशाला में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अमोलक सिंह ढिल्लों, विभिन्न पुलिस अधिकारियों, थाना-चौकी प्रभारियों, प्रशिक्षु उप निरीक्षकों और विवेचकों ने भाग लिया। इस दौरान अपराध अनुसंधान की गुणवत्ता बढ़ाने, जांच में होने वाली सामान्य त्रुटियों को दूर करने तथा पीड़ितों को समय पर न्याय दिलाने के संबंध में विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया। जिला एवं सत्र न्यायाधीश शक्ति सिंह राजपूत ने विवेचकों को मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के नियमों, ई-साक्ष्य के उपयोग, घटनास्थल पर टेस्टिंग किट के इस्तेमाल, साक्ष्य अधिनियम के तहत मेमोरेंडम तैयार करने और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की वैज्ञानिक जांच के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक साक्ष्य का आपस में तार्किक संबंध होना चाहिए और घटनास्थल का सही व स्पष्ट दस्तावेजीकरण आवश्यक है।

प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश ममता पटेल ने केस डायरी को सीलबंद स्थिति में न्यायालय में प्रस्तुत करने, घटनास्थल का फोटोग्राफिक रिकॉर्ड तैयार करने, जब्त सामग्री का वैज्ञानिक परीक्षण कराने और महत्वपूर्ण तथ्यों का विस्तृत उल्लेख करने के निर्देश दिए। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पल्लव रघुवंशी ने गिरफ्तारी की कानूनी प्रक्रिया, महिलाओं की गिरफ्तारी के नियम, पुलिस रिमांड, ट्रांजिट रिमांड, हथकड़ी के उपयोग संबंधी दिशा-निर्देश, एससी-एसटी एक्ट, एनडीपीएस एक्ट, पशु क्रूरता अधिनियम और अन्य मामलों की विवेचना में अपनाई जाने वाली कानूनी प्रक्रियाओं पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया।

प्रधान मजिस्ट्रेट (किशोर न्याय बोर्ड) कल्पना भगत ने किशोर न्याय अधिनियम (JJ Act) के तहत बालकों से जुड़े मामलों की जांच, चाइल्ड-फ्रेंडली वातावरण, सामाजिक पृष्ठभूमि रिपोर्ट तैयार करने और गुमशुदा नाबालिगों के मामलों में मानव तस्करी प्रकोष्ठ को सूचना देने जैसी प्रक्रियाओं की जानकारी दी। कार्यशाला के समापन पर डीआईजी एवं एसएसपी राजेश अग्रवाल ने न्यायिक अधिकारियों का आभार व्यक्त किया और सभी विवेचकों को प्रशिक्षण में दिए गए दिशा-निर्देशों का अक्षरशः पालन करते हुए निष्पक्ष एवं गुणवत्तापूर्ण जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।