बस स्टैंड के लिए ली गई थी मठ की जमीन
रायपुर में अंतरराज्यीय बस स्टैंड के निर्माण के लिए काफी तलाश के बाद रावणभाठा क्षेत्र की जमीन का चयन किया गया था। वर्ष 2007-08 में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की पहल पर दुधाधारी मठ ट्रस्ट के प्रमुख महंत रामसुंदर दास के साथ कई दौर की चर्चा हुई, जिसके बाद उन्होंने अपनी जमीन देने पर सहमति जताई। इसके लिए यह शर्त रखी गई कि मठ को बदले में दूसरी जमीन दी जाएगी और बस स्टैंड परिसर में बनने वाले कॉम्प्लेक्स की आधी दुकानें भी मठ को आवंटित की जाएंगी। इसके बाद जमीन नगर निगम को सौंप दी गई, लेकिन निर्माण कार्य बीच में रुक गया।
लिखित आश्वासन के बाद सौंप दी गई थी जमीन
जानकारी के अनुसार, दुधाधारी मठ ट्रस्ट को जमीन के बदले नवा रायपुर में जमीन देने पर सहमति बनी थी। इसको लेकर लिखित आश्वासन मिलने के बाद ही मठ ने अपनी जमीन सरकार को सौंपी थी।
बाद में जमीन का लैंड यूज बदलकर अंतरराज्यीय बस स्टैंड का निर्माण आगे बढ़ाया गया। बस स्टैंड के नामकरण को लेकर विवाद के बाद इसका नाम दुधाधारी मठ ट्रस्ट के नाम पर रखा गया। भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में भी महंत रामसुंदर दास ने जमीन दिलाने के प्रयास किए। तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जमीन देने का आश्वासन दिया था और तत्कालीन आवास एवं पर्यावरण मंत्री मोहम्मद अकबर ने नवा रायपुर में जमीन आवंटन की प्रक्रिया भी शुरू कराई थी, लेकिन मामला कागजों से आगे नहीं बढ़ सका। इस बीच सरकार बदलने के बाद भी मठ को जमीन नहीं मिली।
समाधान के बाद मठ ने किया हाईकोर्ट का रुख
दुधाधारी मठ ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने पुराने वादे की याद दिलाने के लिए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह से भी मुलाकात की। इसके अलावा महंत रामसुंदर दास ने आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी से भी इस संबंध में चर्चा की, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। इसके बाद ट्रस्ट ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जिसे स्वीकार करते हुए अदालत ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है।
दुकानों के आवंटन में भी गड़बड़ी का आरोप
दुधाधारी मठ ट्रस्ट का आरोप है कि समझौते के तहत बस स्टैंड परिसर में 14 दुकानें देने की बात तय हुई थी, लेकिन पिछली सरकार के दौरान 7 दुकानों को विभाजित कर 14 दुकानें दिखा दी गईं। ट्रस्ट के अनुसार, इसकी जानकारी उस समय हुई जब दुकानों के लिए बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया शुरू हुई। जांच में पता चला कि केवल 7 दुकानों के लिए ही बिजली मीटर स्वीकृत किए गए थे। ट्रस्ट ने इन सभी तथ्यों का उल्लेख हाईकोर्ट में दायर अपनी याचिका में किया है।
