दो अलग-अलग प्रकरणों में पुलिस ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत की कार्रवाई

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रायपुर। प्रदेश में बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत सूरजपुर जिले में प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए दो अलग-अलग मामलों में कुल 11 लोगों के विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध कराया है। जिला बाल संरक्षण इकाई एवं महिला एवं बाल विकास विभाग की जांच में नाबालिग बालिकाओं के विवाह की पुष्टि होने के बाद संबंधित थाना क्षेत्रों में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत कार्रवाई की गई।

जिला प्रशासन द्वारा “बाल विवाह मुक्त सूरजपुर” अभियान के अंतर्गत लगातार निगरानी और जनजागरूकता गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इसी दौरान प्राप्त शिकायतों एवं जांच प्रतिवेदन के आधार पर यह कार्रवाई सामने आई है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि बाल विवाह न केवल सामाजिक कुरीति है, बल्कि यह कानूनन दंडनीय अपराध भी है।

जांच में सामने आए प्रमाण:

जिला बाल संरक्षण अधिकारी द्वारा दोनों मामलों की विस्तृत जांच कर प्रतिवेदन जिला कार्यक्रम अधिकारी को सौंपा गया। जांच के दौरान बालिकाओं के शैक्षणिक दस्तावेज, विवाह आमंत्रण पत्र, पंचनामा और संबंधित पक्षों के कथनों का परीक्षण किया गया। दस्तावेजों से बालिकाओं के नाबालिग होने की पुष्टि हुई, जिसके बाद संबंधित परियोजना अधिकारियों को अपराध दर्ज कराने के निर्देश दिए गए।

प्रेमनगर में 9 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज:

पहले मामले में थाना प्रेमनगर पुलिस ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 की धारा 9, 10 एवं 11 के तहत लड़का, उसके पिता, लड़की के पिता सहित कुल 9 लोगों के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध किया है। यह कार्रवाई परियोजना अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर की गई। दूसरे मामले में चौकी चेन्द्रा, थाना झिलमिली पुलिस ने लड़का एवं उसके पिता के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। यह कार्रवाई भैयाथान परियोजना अधिकारी की रिपोर्ट पर की गई।

जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि, कहीं भी बाल विवाह की जानकारी मिलने पर तत्काल चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, महिला हेल्पलाइन 181, जिला बाल संरक्षण इकाई अथवा नजदीकी थाना एवं महिला एवं बाल विकास विभाग को सूचना दें। प्रशासन ने आश्वस्त किया है कि सूचनादाता की पहचान गोपनीय रखी जाएगी। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि, बाल विवाह में शामिल माता-पिता, विवाह कराने वाले पुरोहित, बाराती एवं अन्य सहयोगी भी कानून के तहत दोषी माने जाते हैं। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के अंतर्गत दोषियों को दो वर्ष तक का कठोर कारावास और एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।