उत्तर प्रदेश में पान मसाला और तंबाकू के अवैध उत्पादन नेटवर्क का भंडाफोड़, 185 करोड़ की कर चोरी उजागर

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डीजीजीआई की कार्रवाई में 27 अघोषित पाउच-पैकिंग मशीनें जब्त, चित्रकूट-बांदा के छह परिसरों से 15.50 लाख से अधिक तैयार पाउच बरामद

नई दिल्ली । जीएसटी खुफिया महानिदेशालय (डीजीजीआई) की लखनऊ क्षेत्रीय इकाई ने उत्तर प्रदेश के चित्रकूट और बांदा जिलों में पान मसाला, सुगंधित जर्दा और गुटखा के अवैध उत्पादन से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। छह उत्पादन परिसरों में की गई कार्रवाई के दौरान 27 अघोषित पाउच-पैकिंग मशीनें जब्त की गईं और करीब 185 करोड़ रुपये की जीएसटी, स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा (एचएसएनएस) उपकर तथा केंद्रीय उत्पाद शुल्क की चोरी का पता चला है।

डीजीजीआई अधिकारियों ने खुफिया जानकारी के आधार पर 18 अगस्त 2026 की मध्यरात्रि के आसपास चित्रकूट और बांदा स्थित छह परिसरों में एक साथ तलाशी अभियान शुरू किया। ये परिसर दो फर्मों से जुड़े पाए गए। इनमें से एक पान मसाला एवं संबंधित उत्पादों के उत्पादन, जबकि दूसरी व्यापारिक गतिविधियों में शामिल थी।

27 अघोषित मशीनें मिलीं
तलाशी के दौरान अधिकारियों को 27 ऐसी पाउच-पैकिंग मशीनें मिलीं, जिनका घोषित उत्पादन व्यवस्था में उल्लेख नहीं था। इनमें सुगंधित जर्दा के लिए छह, पान मसाला के लिए नौ और दोहरा/देसी गुटखा के लिए 12 मशीनें शामिल हैं। इसके अलावा मिश्रण, सुपारी की कुटाई और सुखाने में इस्तेमाल होने वाली मशीनें भी बरामद की गईं।

कार्रवाई के दौरान पान मसाला, चबाने वाला तंबाकू, सुगंधित जर्दा और सुगंधित सुपारी के 15,50,922 तैयार पाउच जब्त किए गए।
जांच के दौरान बड़ी मात्रा में कच्चा माल और पैकिंग सामग्री भी बरामद हुई। इसमें 32.9 मीट्रिक टन सुपारी एवं कटी सुपारी, 2.8 मीट्रिक टन तंबाकू, 8.4 मीट्रिक टन पैकिंग सामग्री, पाउच और लैमिनेट्स, 470 किलोग्राम कत्था पाउडर, 850 किलोग्राम ग्लिसरीन, 545 किलोग्राम एसेंस और 256 किलोग्राम बिना पैक किया हुआ पान मसाला शामिल है।


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अपंजीकृत परिसरों से चल रहा था कारोबार
जांच में सामने आया कि अवैध कारोबार अपंजीकृत परिसरों के एक नेटवर्क के माध्यम से संचालित किया जा रहा था। इन परिसरों में अघोषित मशीनरी के जरिए पान मसाला और तंबाकू उत्पादों का उत्पादन किया जाता था। तैयार माल को लागू जीएसटी, एचएसएनएस उपकर और केंद्रीय उत्पाद शुल्क का भुगतान किए बिना कथित तौर पर गुप्त रूप से बाजार में भेजा जा रहा था।

जांच एजेंसी के अनुसार, निर्माण फर्म के मालिक की इस अवैध उत्पादन और माल की निकासी की गतिविधियों को संगठित करने में प्रमुख भूमिका सामने आई है।

मालिक गिरफ्तार, न्यायिक हिरासत में भेजा गया
फर्म के मालिक को 19 अगस्त 2026 को स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर अधिनियम, 2025 की धारा 26 और केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम, 1944 की धारा 13 के तहत गिरफ्तार किया गया। उसे विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीमा शुल्क), लखनऊ के समक्ष पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

मामले की जांच जारी है। अधिकारियों के अनुसार, जांच आगे बढऩे पर और बरामदगी तथा कर चोरी से जुड़े तथ्यों का खुलासा होने की संभावना है।

1 फरवरी से लागू है क्षमता आधारित कर व्यवस्था
पान मसाला और तंबाकू क्षेत्र में 1 फरवरी 2026 से क्षमता आधारित उपकर और कर व्यवस्था लागू की गई है। स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर अधिनियम, 2025 के तहत पान मसाला पर क्षमता आधारित मासिक उपकर लगाया जाता है। इसकी गणना स्थापित पाउच-पैकिंग मशीनों की संख्या, प्रकार और क्षमता के आधार पर की जाती है।

इसी तरह केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम, 1944 के तहत चबाने वाले तंबाकू, जर्दा और गुटखा पर भी क्षमता आधारित केंद्रीय उत्पाद शुल्क लागू है। डीजीजीआई के अनुसार, कुछ निर्माता अघोषित मशीनों का इस्तेमाल कर उत्पादन छिपाने और कर एवं उपकर से बचने का प्रयास करते हैं।


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देशभर में 27 मामले दर्ज, 668 करोड़ की चोरी का पता
अघोषित उत्पादन और कर चोरी पर अंकुश लगाने के लिए डीजीजीआई ने देशभर में खुफिया सूचना आधारित प्रवर्तन कार्रवाई तेज की है। डेटा विश्लेषण से जुड़ी विभिन्न इकाइयों के समन्वय से अवैध उत्पादन और कर चोरी के मामलों की पहचान की जा रही है।

1 फरवरी 2026 से अब तक डीजीजीआई की विभिन्न इकाइयों ने देशभर में ऐसे 27 मामले दर्ज किए हैं। इन मामलों में कुल 668 करोड़ रुपये के शुल्क, कर और उपकर की चोरी का पता चला है। जांच के दौरान 11.7 करोड़ रुपये की राशि स्वेच्छा से जमा की गई है।

इसके अलावा, कार्रवाई के दौरान अब तक 131 पाउच-पैकिंग मशीनें जब्त की जा चुकी हैं और 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। डीजीजीआई की कार्रवाई से पान मसाला और तंबाकू क्षेत्र में अघोषित उत्पादन तथा कर चोरी के खिलाफ प्रवर्तन अभियान तेज होने के संकेत मिले हैं।