टिकट कैंसिल कराने से रेलवे को कितनी कमाई: संसद में रेल मंत्री ने बताए रिफंड के पूरे नियम

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नई दिल्ली। ट्रेन टिकट रद्द कराने वाले यात्रियों के लिए जरूरी खबर सामने आई है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में बताया कि टिकट कैंसिलेशन शुल्क और बिना रद्द कराए वेटिंग टिकटों से रेलवे को होने वाली आय का अलग-अलग जोनवार रिकॉर्ड नहीं रखा जाता है। सांसद चंद्रकांत हंडोरे के सवाल के जवाब में रेल मंत्री ने कहा कि रेलवे में सामान्य ट्रेनों और प्रीमियम ट्रेनों के टिकट कैंसिलेशन नियम अलग-अलग हैं। यात्रियों को टिकट रद्द कराने से पहले इन नियमों की जानकारी होना जरूरी है।

सामान्य ट्रेनों में कंफर्म टिकट 48 घंटे पहले रद्द कराने पर तय शुल्क काटा जाता है। इसके बाद समय कम होने पर कैंसिलेशन चार्ज बढ़ता जाता है। वहीं, ट्रेन चलने से 4 घंटे से कम समय पहले टिकट रद्द कराने पर कंफर्म टिकट का रिफंड नहीं मिलता। वेटिंग और आरएसी टिकटों पर भी तय क्लर्केज फीस लागू होती है। वहीं, वंदे भारत स्लीपर और अमृत भारत एक्सप्रेस जैसी प्रीमियम ट्रेनों के लिए नए कैंसिलेशन नियम लागू किए गए हैं। इनमें 72 घंटे पहले, 72 से 8 घंटे पहले और 8 घंटे से कम समय के लिए अलग-अलग रिफंड व्यवस्था रखी गई है। रेल मंत्री ने बताया कि, इन नियमों का उद्देश्य फर्जी बुकिंग और टिकटों की कालाबाजारी रोकना है। रेलवे ने यात्रियों की सुविधा और टिकट व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए यह बदलाव किए हैं।