लापता युवती केस में हाईकोर्ट सख्त, DGP और SIT को तलब; DNA जांच में देरी पर नाराजगी

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रांची। झारखंड के बोकारो जिले में 18 वर्षीय युवती के 9 महीने से लापता होने के मामले में Jharkhand High Court ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने जांच की धीमी गति और बरामद कंकाल की अब तक DNA जांच न होने पर राज्य सरकार और पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य के DGP, FSL निदेशक, बोकारो एसपी और पूरी SIT टीम को गुरुवार सुबह 10:30 बजे व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील विंसेट रोहित मार्की ने पुलिस जांच पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने दलील दी कि पुलिस ने एक आरोपी की निशानदेही पर कंकाल बरामद कर उसे लापता युवती का बताया है, जबकि उसकी स्थिति 2 से 3 साल पुरानी प्रतीत होती है। ऐसे में कंकाल की पहचान को लेकर संदेह पैदा हो गया है। साथ ही, यह भी कहा गया कि जिस स्थान से कंकाल मिला है, वह सार्वजनिक जगह है और वह किसी अन्य व्यक्ति का भी हो सकता है। सुनवाई के दौरान अदालत तब नाराज हो गई जब यह सामने आया कि अब तक कंकाल की DNA जांच नहीं कराई गई है और न ही पीड़िता की मां के सैंपल लिए गए हैं। कोर्ट ने इसे जांच में गंभीर लापरवाही करार दिया। यह मामला अगस्त 2025 में दर्ज अपहरण की शिकायत से जुड़ा है। लंबे समय तक पुलिस की निष्क्रियता के बाद पीड़िता की मां ने हाईकोर्ट का रुख किया, जिसके बाद जांच में तेजी आई। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर दिनेश कुमार महतो को गिरफ्तार किया, जिसने कथित तौर पर युवती की हत्या करने की बात स्वीकार की थी। उसकी निशानदेही पर ही कंकाल बरामद किया गया था। हालांकि, अब कंकाल की पहचान को लेकर उठे सवाल और DNA जांच में देरी ने पूरे मामले की जांच पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।