नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर न्यायपालिका और मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ फैलाए जा रहे कथित फर्जी और आपत्तिजनक कंटेंट को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को ऐसे पोस्ट, वीडियो और सामग्री को 24 घंटे के भीतर हटाने का निर्देश दिया है। जस्टिस तेजस करिया की पीठ ने यह आदेश भारतीय बैडमिंटन संघ की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिका में उन डिजिटल रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पोस्ट को हटाने की मांग की गई थी, जिनमें न्यायपालिका के वरिष्ठ सदस्यों और कानून से जुड़े लोगों के एक बैडमिंटन कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर कथित रूप से गलत दावे किए गए थे।
कोर्ट ने कहा कि, प्रथम दृष्टया यह सामग्री झूठी और दुर्भावनापूर्ण प्रतीत होती है, जिसका उद्देश्य न्यायपालिका और महत्वपूर्ण संस्थानों की छवि को नुकसान पहुंचाना है। अदालत ने मेटा, गूगल और एक्स (X) जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया कि, वे आपत्तिजनक सामग्री पर कार्रवाई के लिए केवल कोर्ट के आदेश का इंतजार न करें। हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को भी फर्जी खबरों और भ्रामक डिजिटल सामग्री पर आवश्यक कदम उठाने को कहा है। साथ ही नागरिकों को चेतावनी दी गई है कि, ऐसी सामग्री को बनाना, साझा करना या दोबारा प्रसारित करना प्रतिबंधित रहेगा। अदालत के इस फैसले को डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर फर्जी सूचनाओं के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

