अपोलो अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग का छापा, एयर एंबुलेंस लापरवाही मामले में रिकॉर्ड खंगाल रही जांच टीम

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बिलासपुर। बिलासपुर के अपोलो अस्पताल में कथित चिकित्सीय लापरवाही और एयर एंबुलेंस प्रबंधन में गंभीर अनियमितताओं के आरोपों के बाद स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। रायपुर और बिलासपुर से पहुंची स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम अस्पताल में जांच कर रही है। टीम मरीजों के इलाज से जुड़े दस्तावेज, भर्ती प्रक्रिया, मेडिकल रिकॉर्ड, एयर एंबुलेंस समन्वय और अस्पताल के अन्य रिकॉर्ड की गहन जांच में जुटी हुई है। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब पूर्व मेयर एवं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्वर्गीय राजेंद्र शुक्ला की मौत के मामले में भी अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं। वहीं एयर एंबुलेंस से जुड़े नए विवाद के बाद कांग्रेस ने आंदोलन की चेतावनी दी है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी अस्पताल के विभिन्न विभागों से दस्तावेजों का मिलान कर आवश्यक जानकारी जुटा रहे हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। दरअसल, पीडब्ल्यूडी विभाग में कार्यरत राजकुमार अग्रवाल की तबीयत खराब होने के बाद उन्हें अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। चिकित्सकों ने बेहतर इलाज के लिए उन्हें हैदराबाद रेफर करने की सलाह दी। परिजनों ने लगभग 13 लाख रुपये खर्च कर एयर एंबुलेंस बुक कराई, जो निर्धारित समय पर चकरभाठा एयरपोर्ट भी पहुंच गई थी। परिजनों का आरोप है कि एयर एंबुलेंस उपलब्ध होने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन समय पर मरीज को एयरपोर्ट नहीं पहुंचा सका। उनका कहना है कि अस्पताल परिसर में एंबुलेंस मौजूद होने के बावजूद उन्हें निजी एंबुलेंस की व्यवस्था करने के लिए कहा गया। साथ ही मरीज के साथ अस्पताल की ओर से कोई डॉक्टर या प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ भी नहीं भेजा गया।

परिजनों के अनुसार, एयरपोर्ट पहुंचने तक मरीज की हालत गंभीर हो गई। वहां मौजूद मेडिकल टीम ने जोखिम को देखते हुए मरीज को हैदराबाद ले जाने से इनकार कर दिया, जिसके बाद उसे दोबारा अपोलो अस्पताल लाना पड़ा। बाद में अस्पताल ने मरीज के लिए विशेष लंग्स सपोर्ट सिस्टम और विशेषज्ञ मेडिकल टीम की आवश्यकता बताई। अगले दिन हैदराबाद से तीन सदस्यीय विशेषज्ञ टीम बिलासपुर पहुंची। पूरे दिन मरीज की स्थिति स्थिर करने के बाद शाम को दोबारा एयर एंबुलेंस से हैदराबाद रवाना किया गया। इस बार भी निजी एंबुलेंस का उपयोग किया गया, लेकिन हैदराबाद से आई मेडिकल टीम ने पहले एंबुलेंस और उसमें उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं का निरीक्षण किया, उसके बाद ही मरीज को एयरपोर्ट ले जाने की अनुमति दी।

परिजनों के मुताबिक अब तक अस्पताल में इलाज पर करीब 2.87 लाख रुपये, एयर एंबुलेंस बुकिंग पर 13 लाख रुपये, अतिरिक्त हैंडलिंग शुल्क के रूप में करीब 2 लाख रुपये और विशेषज्ञ मेडिकल टीम व उपकरणों पर लगभग 7 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। इस तरह कुल खर्च करीब 23 लाख रुपये तक पहुंच गया है। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग पूरे मामले की जांच कर रहा है। अस्पताल प्रबंधन की भूमिका, उपचार प्रक्रिया और एयर एंबुलेंस समन्वय में किसी प्रकार की लापरवाही हुई या नहीं, इसका खुलासा जांच रिपोर्ट आने के बाद ही होगा।