हौज रानी आग में वेंटिलेशन की खामी उजागर

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नई दिल्ली। दक्षिणी दिल्ली के हौज रानी इलाके में स्थित फ्लोरिश स्टे बीएंडबी में हुए भीषण अग्निकांड की मजिस्ट्रियल जांच रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। तीन जून को हुए इस हादसे में 23 लोगों की मौत हो गई थी। अब सामने आई 111 पन्नों की जांच रिपोर्ट में दिल्ली पुलिस, नगर निगम (एमसीडी), पर्यटन विभाग और बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड (बीआरपीएल) की गंभीर लापरवाही सामने आई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्षों तक नियमों की अनदेखी और समय पर कार्रवाई नहीं होने के कारण अवैध निर्माण बढ़ता गया, जिसका परिणाम एक बड़ी त्रासदी के रूप में सामने आया।

नई दिल्ली के लिए रवाना जांच रिपोर्ट के अनुसार, भवन में लंबे समय से अवैध निर्माण जारी था, लेकिन संबंधित विभाग इसे रोकने में पूरी तरह नाकाम रहे। रिपोर्ट में बताया गया कि एमसीडी ने वर्ष 2019 और 2020 में अवैध निर्माण को लेकर नोटिस जारी किए थे, लेकिन पुलिस ने इन नोटिसों को गंभीरता से लागू नहीं कराया। मालवीय नगर थाना पुलिस पर आरोप लगाया गया है कि अवैध निर्माण से जुड़ी शिकायतों और एफआईआर की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों तक नहीं पहुंचाई गई, जिससे निर्माण कार्य लगातार चलता रहा

जांच में पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि भवन में अवैध निर्माण की जानकारी होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। बीट अधिकारियों की भूमिका पर भी संदेह जताया गया है और संभावित मिलीभगत की आशंका की बात कही गई है। वर्ष 2024 में सुरक्षा मानकों की कमी को लेकर दर्ज मामले के बावजूद पुलिस ने भवन में मौजूद अन्य अनियमितताओं की जानकारी उच्च अधिकारियों को नहीं दी। मजिस्ट्रियल जांच में पर्यटन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भवन के निरीक्षण के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्यों को नजरअंदाज किया गया। जांच समिति ने भवन को सुरक्षा, स्वच्छता, अग्नि सुरक्षा और वेंटिलेशन के मानकों पर सही बताया, जबकि वास्तविकता में वहां कई गंभीर कमियां मौजूद थीं।

रिपोर्ट में बताया गया कि भवन में बेसमेंट मौजूद था और निर्माण चार मंजिल से अधिक था, लेकिन निरीक्षण रिपोर्ट में इन तथ्यों को सही तरीके से दर्ज नहीं किया गया। जांच में पाया गया कि कई कमरों में पर्याप्त वेंटिलेशन नहीं था। आग लगने के बाद धुआं तेजी से फैलने और दम घुटने से बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई। रिपोर्ट ने इसे निरीक्षण प्रक्रिया में बड़ी लापरवाही बताया। एमसीडी और बीआरपीएल की भूमिका को लेकर भी रिपोर्ट में कई सवाल उठाए गए हैं। जांच के अनुसार, एमसीडी ने अवैध निर्माण रोकने के लिए पुलिस से कार्रवाई की मांग की थी और वर्ष 2020 में बिजली कनेक्शन काटने के लिए बीआरपीएल को पत्र भी भेजा था। इसके बावजूद निर्माण पूरा हो गया और भवन का संचालन जारी रहा।

बीआरपीएल पर भी कार्रवाई में देरी का आरोप लगाया गया है। रिपोर्ट में कहा गया कि एमसीडी के बिजली काटने के अनुरोध पर बीआरपीएल ने तत्काल कार्रवाई करने के बजाय ध्वस्तीकरण कार्यक्रम की जानकारी मांगी। जांच समिति ने इसे निर्देशों की गलत व्याख्या और गंभीर अनदेखी बताया। जांच में भवन मालिक और प्रबंधन को भी जिम्मेदार ठहराया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, यह भवन पहले केवल ढाई मंजिला था, लेकिन मालिक लवकेश बजाज ने इसे अवैध तरीके से ग्राउंड प्लस चार मंजिला तक बढ़ा दिया। वर्ष 2023 में यहां रेस्तरां शुरू किया गया और छत पर अतिरिक्त कमरे भी बनाए गए, जिनके लिए जरूरी अनुमति नहीं ली गई थी। रिपोर्ट में आग लगने की घटना का कारण भी बताया गया है।

जांच के मुताबिक,
तीन जून की सुबह करीब 8:30 बजे रसोई में इलेक्ट्रिक एयर फ्रायर के पास आग लगी। इसके बाद एलपीजी पाइप जलने से गैस रिसाव हुआ और धुआं तेजी से पूरे भवन में फैल गया। आपातकालीन कॉल सुबह करीब 8:15 से 8:45 बजे के बीच की गई थी, जबकि दमकल की गाड़ियां लगभग 9:15 से 9:30 बजे के बीच मौके पर पहुंचीं। मजिस्ट्रियल जांच रिपोर्ट में भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कई सुझाव दिए गए हैं। इनमें नियमित संरचनात्मक ऑडिट, सुरक्षा निरीक्षण, जोखिम क्षेत्रों की पहचान, मॉक ड्रिल, बीएंडबी और व्यावसायिक भवनों के लिए सख्त अग्नि सुरक्षा नियम लागू करना शामिल है।

इसके अलावा रिपोर्ट में दोषी अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई, दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को मजबूत करने और फायर स्टेशनों में अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराने की सिफारिश की गई है। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने भवन मालिक लवकेश बजाज, रसोइया केशव नेगी और जय मिश्रा को गिरफ्तार किया था। उनके खिलाफ गैर इरादतन हत्या, लापरवाही और मानव जीवन को खतरे में डालने जैसी धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। जांच रिपोर्ट के बाद अब संबंधित विभागों की जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।