नई दिल्ली। E-20 पेट्रोल को लेकर देशभर में उठ रहे सवालों के बीच केंद्र सरकार ने पेट्रोल में E-22 से E-30 तक उच्च एथेनॉल ब्लेंडिंग लागू करने की प्रक्रिया फिलहाल धीमी कर दी है। हालांकि भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) इन मिश्रणों के मानक तय कर चुका है, लेकिन सरकार अब जल्दबाजी के बजाय तकनीकी अध्ययन और व्यापक जन-परामर्श के बाद ही आगे बढ़ेगी। E-20 पेट्रोल को लेकर वाहन मालिकों ने माइलेज में कमी, इंजन और पुराने वाहनों पर संभावित असर जैसी चिंताएं जताई हैं। ऑटोमोबाइल कंपनियों की ओर से सफाई दिए जाने के बावजूद इस मुद्दे पर बहस जारी है। इसी वजह से उच्च एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधनों पर नीति निर्माण की रफ्तार फिलहाल धीमी कर दी गई है।
सरकार ने ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) को E-22 से E-30 तक के ईंधनों का मौजूदा वाहनों पर प्रभाव जांचने की जिम्मेदारी सौंपी है। अध्ययन में माइलेज, इंजन की कार्यक्षमता, रखरखाव लागत और वाहन प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाएगा। रिपोर्ट अगले वर्ष के अंत तक आने की संभावना है। सरकार चार प्रमुख पहलुओं पर फैसला करेगी। इनमें उत्पाद शुल्क में संभावित राहत का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाने, E-22 या उससे अधिक एथेनॉल मिश्रण के लिए इंजन, फ्यूल सिस्टम और सॉफ्टवेयर अपग्रेड की जरूरत का आकलन, कम माइलेज की शिकायतों के समाधान के तकनीकी विकल्पों का परीक्षण तथा अधिक एथेनॉल की मांग से किसानों और चीनी मिलों को होने वाले संभावित लाभ का मूल्यांकन शामिल है।
E-22, E-25, E-27 और E-30 ऐसे ईंधन हैं, जिनमें सामान्य पेट्रोल की तुलना में अधिक एथेनॉल मिलाया जाता है। सरकार का मानना है कि इन ईंधनों को लागू करने से पहले तकनीकी, आर्थिक और उपभोक्ता हितों से जुड़े सभी पहलुओं की गहन समीक्षा जरूरी है। इसलिए अंतिम फैसला अध्ययन रिपोर्ट और विशेषज्ञों की राय के बाद ही लिया जाएगा।
