वनभूमि विवाद: अतिक्रमणकारियों के दावे और डिजिटल सबूतों के बीच बढ़ा टकराव

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गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के उदंती सीतानदी अभयारण्य में वनभूमि अतिक्रमण का बड़ा मामला सामने आया है, जहां हजारों पेड़ों की अवैध कटाई और 265 एकड़ भूमि पर कब्जे के आरोपों का सामना कर रहे 166 लोगों ने खुद को “प्रकृति प्रेमी” बताते हुए सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। अतिक्रमणकारियों ने अभयारण्य कार्यालय में दिए गए लिखित जवाब में दावा किया कि, वे पीढ़ियों से इस भूमि पर काश्तकारी कर रहे हैं और यह उनकी पारंपरिक जमीन है। उन्होंने यह भी कहा कि, क्षेत्र में सुरक्षा गार्ड तैनात हैं, इसलिए पेड़ों की कटाई उन्होंने नहीं की।

वहीं वन विभाग का कहना है कि, उनके पास मजबूत डिजिटल और सैटेलाइट साक्ष्य मौजूद हैं, जिनसे 2005 से 2022 के बीच बड़े पैमाने पर वन कटाई की पुष्टि होती है। अधिकारियों के अनुसार 2011 में 45 हेक्टेयर और बाद में यह बढ़कर 106 हेक्टेयर तक पहुंच गई। उप निदेशक वरुण जैन ने बताया कि, गूगल अर्थ और रिमोट सेंसिंग तकनीक के जरिए पूरे क्षेत्र की मॉनिटरिंग की गई, जिसमें अवैध गतिविधियां स्पष्ट रूप से सामने आईं।

पेड़ों के ठूंठ और जलाए गए अवशेष भी साक्ष्य के रूप में दर्ज किए गए हैं। मामले में सभी आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है। अब यह विवाद अदालत में पहुंचेगा, जहां तय होगा कि, सच किसके पक्ष में है। वहीं बेदखली के बाद कई क्षेत्रों में हरियाली फिर से लौटने लगी है।