DAV मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल, टिकुलिया में लगभग 200 विद्यार्थियों को बाल अधिकारों, बाल सुरक्षा एवं साइबर अपराधों के प्रति किया गया जागरूक
भाटापारा। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के बाल सुरक्षा एवं विधिक जागरूकता कार्यक्रम के अंतर्गत आज DAV मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल, टिकुलिया* में विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में लगभग 200 छात्र-छात्राओं ने सहभागिता की। इस अवसर पर जिला न्यायाधीश अशोक कुमार लाल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए बाल अधिकारों, बच्चों की सुरक्षा, लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (POCSO Act, 2012), व्यक्तिगत सुरक्षा, साइबर अपराधों तथा विधिक सहायता की उपलब्ध व्यवस्थाओं के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षकगण, पुलिस प्रतिनिधि, अधिवक्तागण एवं पैरालीगल वॉलंटियर्स (PLVs) भी उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में लाल ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए कहा कि “कानून की जानकारी केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। प्रत्येक बच्चे को यह मालूम होना चाहिए कि उसके अधिकार क्या हैं, असुरक्षित परिस्थिति में उसे क्या करना है और सहायता के लिए कहाँ संपर्क करना है।” उन्होंने कहा कि 18 वर्ष से कम आयु का प्रत्येक व्यक्ति कानून की दृष्टि में बच्चा है तथा प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित वातावरण, सम्मान और गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार है।
बच्चों की व्यक्तिगत सुरक्षा और आत्मसम्मान पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि “आपकी सुरक्षा किसी व्यक्ति के गुस्से, धमकी या प्रतिष्ठा से अधिक महत्वपूर्ण है। यदि कोई व्यवहार आपको असहज करता है, तो उसे चुपचाप सहन करना आपकी मजबूरी नहीं है।” उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि किसी भी प्रकार के अनुचित व्यवहार, शारीरिक या मानसिक उत्पीड़न की स्थिति में बिना संकोच अपने माता-पिता, शिक्षक अथवा किसी विश्वसनीय वयस्क को अपनी बात बतानी चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि *“यदि किसी बच्चे के साथ कोई अप्रिय घटना घटित होती है, तो उसे दोषी या शर्मिंदा महसूस नहीं कराया जाना चाहिए। गलत व्यवहार करने वाला व्यक्ति जवाबदेह है, पीड़ित बच्चा नहीं।”
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डिजिटल युग में बच्चों की सुरक्षा पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने सोशल मीडिया पर अनजान व्यक्तियों से संपर्क, निजी तस्वीरें साझा करने, ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग, साइबर बुलिंग तथा वित्तीय साइबर धोखाधड़ी के खतरों के प्रति विद्यार्थियों को सचेत किया। उन्होंने STOP–SAVE–BLOCK–REPORT–TELL का संदेश देते हुए कहा कि “इंटरनेट की दुनिया में भी वही सावधानी आवश्यक है, जो हम वास्तविक जीवन में बरतते हैं। Think before you click, think before you share.” उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि ऑनलाइन किसी भी प्रकार की धमकी या उत्पीड़न की स्थिति में घबराने अथवा दबाव में आने के बजाय साक्ष्य सुरक्षित रखकर उचित माध्यम से शिकायत करनी चाहिए।
कार्यक्रम में बच्चों को विभिन्न महत्वपूर्ण हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी भी दी गई। उन्हें बताया गया कि तत्काल आपातकालीन सहायता के लिए 112, बाल संरक्षण एवं सहायता के लिए 1098, ऑनलाइन वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की शिकायत के लिए **1930* तथा विधिक सहायता संबंधी जानकारी के लिए 15100 पर संपर्क किया जा सकता है। साइबर अपराधों की शिकायत के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल *www.cybercrime.gov.in* की जानकारी भी दी गई। इस संबंध में उन्होंने कहा कि *“मदद माँगना कमजोरी नहीं, बल्कि साहस है। किसी समस्या के गंभीर होने का इंतजार मत कीजिए; समय पर सही व्यक्ति तक अपनी बात पहुँचाइए।”*
विद्यार्थियों को जिम्मेदार नागरिक एवं संवेदनशील मित्र बनने की प्रेरणा देते हुए उन्होंने कहा कि “असली ताकत दूसरों को डराने में नहीं, बल्कि उनका सम्मान करने और सही समय पर सही काम करने में है।” उन्होंने बच्चों को किसी साथी का मजाक उड़ाने, उसे अपमानित करने, सामाजिक रूप से अलग करने अथवा सोशल मीडिया पर परेशान करने जैसी गतिविधियों से दूर रहने की सलाह दी। साथ ही कहा कि यदि किसी बच्चे को परेशान किया जा रहा हो, तो अन्य विद्यार्थियों को मूकदर्शक बने रहने के बजाय उसका सहयोग करना चाहिए।
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कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षकों, पुलिस प्रतिनिधियों, अधिवक्ताओं एवं पैरालीगल वॉलंटियर्स की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए लाल ने कहा कि “बच्चों की सुरक्षा केवल किसी एक संस्था या व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं है। न्यायपालिका, पुलिस, विधिक सेवा प्राधिकरण, विद्यालय, अभिभावक और समाज—सभी को मिलकर ऐसा वातावरण बनाना होगा, जहाँ प्रत्येक बच्चा स्वयं को सुरक्षित और सम्मानित महसूस करे।”
कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों को बाल सुरक्षा एवं सम्मान के प्रति जागरूक रहने, स्वयं सुरक्षित रहने तथा दूसरों की सुरक्षा में सहयोग करने की शपथ दिलाई गई।
