रायपुर। छत्तीसगढ़ में कोयला उत्पादन और खनन गतिविधियों के निरंतर विस्तार से प्रदेश की आर्थिक संरचना को मजबूती मिलेगी। केंद्रीय कोयला राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने बीती रात अटल नगर नवा रायपुर में कहा कि राज्य कोयला क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है और यहां संचालित परियोजनाएं आने वाले समय में आर्थिक विकास तथा रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। मंत्री दुबे ने नवा रायपुर में कोयला मंत्रालय द्वारा आयोजित स्टार रेटिंग अवॉर्ड समारोह में यह बात कही। इस अवसर पर कोयला और लिग्नाइट खदानों की रेटिंग सूची जारी की गई तथा खनन क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली कंपनियों को पुरस्कृत किया गया।
केंद्रीय मंत्री ने खनन परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण से जुड़े सवाल पर कहा कि प्रभावित भू-स्वामियों को सरकार के निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप उचित मुआवजा दिया जाता है। उन्होंने बताया कि खनन प्रभावित क्षेत्रों में कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (सीएसआर) और डिस्ट्रिक मिनिरल फंड के माध्यम से विकास कार्य कराए जा रहे हैं। विशेष रूप से नई खदानों के लिए चिह्नित क्षेत्रों में स्थानीय लोगों की सुविधाओं और बुनियादी ढांचे के विकास पर ध्यान दिया जाता है। उन्होंने कहा कि किसी भी खदान के 25 किलोमीटर के क्षेत्र में विकास कार्य नियमित रूप से किए जा रहे हैं।
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कोयला परिवहन के कारण यात्री ट्रेनों के परिचालन में होने वाली देरी के संबंध में दुबे ने कहा कि इस समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में केंद्र सरकार काम कर रही है। मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों के संचालन में बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए कोयला ढुलाई हेतु अलग कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा, “जब से हमारी सरकार आई है हम लगातार विकास की तरफ आगे बढ़ रहे हैं. जो भी संभव व्यवस्था है उसको तेज करने का काम किया जा रहा है। ट्रेन के परिचालन में खासतौर से माल गाड़ियों के चलने के समय पैसेंजर यातायात के प्रभावित होने की जानकारी होती है। इसको सुधारने के लिए तेजी से काम भी किया जा रहा है, क्योंकि इसके लिए हम लोग एक अलग से पूरा कॉरिडोर का ही निर्माण कर रहे हैं।”
दुबे ने पूर्ववर्ती वर्षों में विकास कार्यों की गति को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि देश को पीछे धकेलने वाली परिस्थितियों से उबरने के लिए वर्तमान सरकार विभिन्न क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार कर रही है। खदानों की स्टार रेटिंग प्रक्रिया की जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इसके लिए विभिन्न मापदंड निर्धारित किए गए हैं। इनमें खनन शुरू होने के बाद प्रदूषण नियंत्रण की स्थिति, कोयला उत्पादन की मात्रा और रोजगार के नए अवसरों का सृजन प्रमुख हैं। इन मानकों पर कंपनियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन कर रेटिंग निर्धारित की जाती है।
पर्यावरण संरक्षण के संबंध में उन्होंने कहा कि खनन गतिविधियों के दौरान वन क्षेत्र को होने वाली क्षति की भरपाई के लिए वृक्षारोपण संबंधी दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। इसके तहत एक एकड़ जंगल काटने की स्थिति में दो एकड़ भूमि पर वृक्षारोपण करना अनिवार्य किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संबंधित कंपनियों को निर्धारित नियमों और दिशानिर्देशों का हर हाल में पालन करना होगा।
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