दिल्ली। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन ने बुधवार को केंद्र सरकार से असम में आई विनाशकारी बाढ़ को ‘राष्ट्रीय आपदा’ घोषित करने की मांग की। पार्टी का आरोप है कि यह आपदा न केवल भारी बारिश के कारण और गंभीर हुई, बल्कि बेरोकटोक माइनिंग, पर्यावरण को नुकसान और बाढ़ प्रबंधन के खराब इंफ्रास्ट्रक्चर की वजह से भी हालात बिगड़े। पार्टी की केंद्रीय समिति की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि बाढ़ की ताजा लहर से सात जिले – शिवसागर, चराइदेव, गोलाघाट, जोरहाट, नागांव, सोनितपुर और कामरूप बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। इसमें लगभग 75 लोगों की मौत हुई है और हजारों लोग प्रभावित हुए हैं।
सीबीआई(एमएल) का दावा है कि शिवसागर जिला सबसे ज्यादा प्रभावित इलाका बनकर उभरा है, जहां घरों, खेती की जमीन और सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुंचा है। पार्टी ने इस बाढ़ को हाल के वर्षों में असम में आई सबसे गंभीर बाढ़ों में से एक बताया है, जबकि राज्य में ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों के कारण मॉनसून में अक्सर बाढ़ आती रहती है। पार्टी ने माना कि पड़ोसी नागालैंड और आस-पास के इलाकों में भारी बारिश से बाढ़ आई, लेकिन साथ ही यह भी आरोप लगाया कि असम-नागालैंड बॉर्डर पर बड़े पैमाने पर माइनिंग ने तबाही को और बढ़ा दिया।
बयान में आगे कहा गया कि नदी के ऊपरी इलाकों में पेड़ों की कटाई, पुराने और कमजोर तटबंध, और क्लाइमेट चेंज की वजह से हुई बहुत ज्यादा बारिश ने इस आपदा को और गंभीर बना दिया। पार्टी का तर्क था कि इन वजहों ने बार-बार आने वाली प्राकृतिक आपदा को एक बड़े मानवीय संकट में बदल दिया है। बाढ़ से प्रभावित परिवारों के साथ एकजुटता दिखाते हुए सीपीआई (एमएल) ने केंद्र सरकार से मांग की कि वह तुरंत बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करे और राहत, बचाव और पुनर्वास कार्यों के लिए सभी उपलब्ध संसाधनों को जुटाए।
पार्टी ने प्रभावित लोगों के लिए पूरे मुआवजे की भी मांग की, जिसमें मृतकों के परिवारों को आर्थिक मदद, घायलों का इलाज, क्षतिग्रस्त घरों का पुनर्निर्माण, आजीविका की बहाली और लंबे समय के पुनर्वास के उपाय शामिल हैं। इसके अलावा, सीबीआई (एमएल) ने इस आपदा के असल कारणों की जांच करने और असम में बाढ़ के असर को कम करने के लिए टिकाऊ और लंबे समय तक चलने वाली रणनीतियों का सुझाव देने के लिए एक हाई-लेवल साइंटिफिक कमीशन बनाने की मांग की। यह मांग राज्य के कई हिस्सों में बाढ़ और कटाव की लगातार चुनौतियों के बीच की गई है, जहां कई इलाकों में पानी का स्तर ऊंचा बना हुआ है और अधिकारी राहत और बचाव कार्यों में जुटे हुए हैं।

