धमतरी। मौसम की मार के बीच चर्रा के कछारपारा में एक बीमार व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को ऐसी मशक्कत करनी पड़ी, जिसने गांव की जमीनी हकीकत सामने ला दी। बारिश के बाद नदी-नालों का जलस्तर बढऩे से ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन की मुश्किलें फिर सामने आने लगी हैं। ग्राम पंचायत लटियारा के आश्रित ग्राम चर्रा के कछारपारा में गोपेश कुमार पटेल की तबीयत बिगडऩे पर ग्रामीणों को उसे खाट पर लिटाकर डूमर नाला पार कराना पड़ा। रात में नाला उफान पर होने के कारण अस्पताल पहुंचना संभव नहीं था।
सुबह पानी कम होने पर सरपंच रूपेश कुमार धु्रव सहित ग्रामीणों ने मरीज को उप स्वास्थ्य केंद्र हिरीडीह पहुंचाया। ग्रामीणों के अनुसार गोपेश को उल्टी-दस्त और बुखार की शिकायत थी। उप स्वास्थ्य केंद्र में जांच के बाद उसे उपचार और आवश्यक दवाइयां दी गईं। मलेरिया जांच की रिपोर्ट निगेटिव आई। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार उपचार के बाद मरीज की स्थिति सामान्य है। इस घटना ने स्वास्थ्य सुविधा से ज्यादा बरसात में आवागमन की उस समस्या को उजागर किया है, जिसका ग्रामीण करीब 30 वर्षों से स्थायी समाधान मांग रहे हैं।
डूमर नाले पर पुलिया नहीं होने से पानी बढ़ते ही रास्ता बाधित हो जाता है। इसका असर खासकर स्कूली बच्चों और आपात स्थिति में मरीजों पर पड़ता है। सरपंच रूपेश कुमार धु्रव ने कहा कि पुलिया निर्माण की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन अब तक समाधान नहीं हुआ। उन्होंने शासन-प्रशासन से जल्द निर्माण कराने की मांग की, ताकि बारिश में बच्चों को स्कूल जाने और मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।
प्रशासन ने कहा-108 पर कॉल नहीं किया गया
जिला प्रशासन की ओर से जारी विज्ञप्ति में स्वास्थ्य विभाग ने मरीज को उपचार नहीं मिलने संबंधी खबर को वास्तविक स्थिति से परे बताया है।विभाग के अनुसार गांव की मितानिन ने प्राथमिक उपचार और दवाइयां उपलब्ध कराई थीं। इसके बाद परिजन 108 एंबुलेंस को कॉल किए बिना मरीज को खाट के जरिए नदी पार कर उप स्वास्थ्य केंद्र ले गए।
नवाचार सरकारी सेवाओं को आमजनों के लिए बेहतर बनाने में उपयोगी साबित हो रहे – टीम
विभाग ने बताया कि हिरीडीह मार्ग से एंबुलेंस की पहुंच संभव है और आपात स्थिति में 108 सेवा का उपयोग किया जाना चाहिए। स्वास्थ्य विभाग की सफाई से मरीज को उपचार मिलने की स्थिति स्पष्ट हो गई, लेकिन पुलिया नहीं होने से बारिश में रास्ता बाधित होने का सवाल बरकरार है। तीन दशक से चली आ रही मांग के बीच अब ग्रामीणों की नजर इस बात पर है कि डूमर नाले पर पुलिया निर्माण कब शुरू होगा।

