सावधान! शुरू होने जा रहा है ‘मृत्यु पंचक’, भूलकर भी न करें ये 4 काम; जानिए समय और नियम

Follow Us

नई दिल्ली। हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले सही मुहूर्त और नक्षत्रों का विशेष ध्यान रखा जाता है। ज्योतिष गणना के अनुसार, जून महीने में एक बार फिर ‘पंचक काल’ की शुरुआत होने जा रही है। शनिवार से शुरू होने के कारण इस बार इसे ‘मृत्यु पंचक’ कहा जा रहा है, जिसे शास्त्रों में बेहद संवेदनशील और अशुभ माना गया है। इस बार मृत्यु पंचक की शुरुआत 6 जून, शनिवार को शाम 7 बजकर 03 मिनट से हो रही है, जो 11 जून को सुबह 8 बजकर 16 मिनट पर समाप्त होगा। ज्योतिष के अनुसार, जब चंद्रमा धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्रों में गोचर करता है, तो उस 5 दिनों की अवधि को पंचक कहा जाता है। शनिवार से शुरू होने वाला पंचक दुर्घटनाओं, बीमारी और अचानक आने वाले संकटों का संकेत देता है।

इस दौरान कुछ विशेष कार्यों को करने से बिल्कुल बचना चाहिए। सबसे पहले, दक्षिण दिशा (यमराज की दिशा) में यात्रा करने से परहेज करें। इसके अलावा, पंचक के दौरान घर की छत या लेंटर डालना वर्जित माना गया है। तीसरी बड़ी सावधानी यह है कि लकड़ी, घास या कोई भी ज्वलनशील सामग्री घर में जमा न करें, क्योंकि इससे अग्नि का भय रहता है। साथ ही, इस अवधि में नया बेड या चारपाई खरीदना या बनवाना भी घर में अशांति ला सकता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि पंचक काल में किसी की मृत्यु हो जाती है, तो परिवार को अन्य संकटों से बचाने के लिए अंतिम संस्कार के समय विशेष विधि अपनाई जाती है। इसके तहत शव के साथ आटे या कुशा (घास) के पांच पुतले बनाकर उनका भी पूर्ण विधि-विधान से दाह संस्कार किया जाता है। ज्योतिषियों का कहना है कि इस काल से डरने के बजाय सतर्कता बरतना और मांगलिक कार्यों को कुछ समय के लिए टाल देना ही सबसे बड़ा उपाय है।