भाजपा का बस्तर मॉडल आदिवासियों के विनाश एवं कॉर्पोरेट लूट का मॉडल : बैज

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रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार के बस्तर विकास मॉडल पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि यह आदिवासियों के विकास के बजाय उनके जल-जंगल-जमीन और प्राकृतिक संसाधनों को कॉर्पोरेट घरानों के हवाले करने का मॉडल है। बैज ने बुधवार को रायपुर से जारी अपने बयान में कहा कि राज्य की भाजपा सरकार बस्तर और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास और सुरक्षा के बड़े दावे कर रही है, लेकिन नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवार मुआवजे और पुनर्वास के लिए भटक रहे हैं।

उन्होंने दावा किया कि आत्मसमर्पण कर चुके कई पूर्व नक्सलियों को भी पुनर्वास नीति का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि हाल में महाराष्ट्र के गढ़चिरौली से मुख्यधारा में लौटे 50 से अधिक पूर्व नक्सलियों को उनके गृह क्षेत्र बस्तर भेजा गया है। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि उन्हें पुनर्वास योजनाओं के तहत अब तक क्या लाभ उपलब्ध कराए गए हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की वर्ष 2025 में बस्तर पंडुम के दौरान की गई घोषणा का उल्लेख करते हुए दावा किया कि प्रत्येक ‘नक्सल मुक्त गांव’ को विकास कार्यों के लिए अलग से एक करोड़ रुपये देने की बात कही गई थी, लेकिन अब तक किसी गांव को यह राशि नहीं मिली है। बैज ने आरोप लगाया कि संसाधनों की लूट का विरोध करने वाले निर्दोष आदिवासियों को नक्सली सहयोगी बताकर जेलों में बंद किया गया।


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उन्होंने सवाल किया कि जब आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटने का अवसर दिया जा रहा है तो नक्सली सहयोगी होने के आरोप में जेलों में बंद निर्दोष आदिवासियों के मामलों की समीक्षा कर उनकी रिहाई क्यों नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने ‘विश्वास, विकास और सुरक्षा’ की नीति के तहत निर्दोष आदिवासियों की रिहाई के लिए जस्टिस पटनायक समिति गठित की थी।

इसके साथ ही वनोपजों की कीमत और संग्रहण की मात्रा बढ़ाकर आदिवासियों की आय बढ़ाने तथा बस्तर के प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के प्रयास किए गए थे। बैज ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार सुरक्षा और विकास के नाम पर जंगलों की कटाई कर बस्तर के जल-जंगल-जमीन तथा खनिज संसाधनों को उद्योगपतियों के हवाले कर रही है। उन्होंने नंदराज पर्वत, बैलाडीला, बचेली, किरंदुल और कांकेर के हाहालदी क्षेत्र का उल्लेख करते हुए विभिन्न परियोजनाओं और खनन गतिविधियों को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए।


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उन्होंने आरोप लगाया कि बीजापुर और नारायणपुर के जंगलों के साथ शबरी, डंकनी, शंखनी और इंद्रावती नदियों तथा क्षेत्र के बहुमूल्य खनिज संसाधनों पर औद्योगिक हितों को प्राथमिकता दी जा रही है। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि बस्तर में विकास के नाम पर प्रकृति, पर्यावरण और स्थानीय आदिवासियों के भविष्य को दांव पर नहीं लगाया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार वास्तविक समस्याओं का समाधान करने के बजाय प्रचार और विज्ञापनों के जरिए बस्तर के विकास की तस्वीर पेश कर रही है।