नई दिल्ली। इस वर्ष रक्षाबंधन के दिन चंद्र ग्रहण का संयोग बन रहा है। ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल है कि क्या ग्रहण का असर राखी के पर्व पर पड़ेगा, क्या सूतक काल मान्य होगा और क्या पूजा-पाठ या शुभ कार्यों में कोई बाधा आएगी। खगोलीय और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस बार भारत में रक्षाबंधन पर किसी तरह की परेशानी नहीं होगी। 28 अगस्त को लगने वाला यह आंशिक चंद्र ग्रहण भारतीय समयानुसार सुबह 6:53 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक रहेगा। ग्रहण के दौरान चंद्रमा का बड़ा हिस्सा पृथ्वी की छाया में रहेगा, जिससे कुछ देशों में यह ब्लड मून जैसा दिखाई दे सकता है।
हालांकि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। ग्रहण के समय चंद्रमा भारत के आकाश में मौजूद नहीं रहेगा। इसी वजह से इसका धार्मिक प्रभाव भारत में मान्य नहीं माना जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चंद्र ग्रहण से लगभग 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू होता है, लेकिन यह नियम केवल उन क्षेत्रों पर लागू होता है जहां ग्रहण दिखाई देता है। चूंकि यह ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होगा, इसलिए भारत में सूतक काल मान्य नहीं रहेगा।
ऐसे में रक्षाबंधन का पर्व पूरे उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जा सकेगा। बहनें बिना किसी ग्रहण संबंधी चिंता के अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। हालांकि, भद्राकाल में राखी बांधना शुभ नहीं माना जाता, इसलिए शुभ मुहूर्त का ध्यान रखना उचित रहेगा। कुल मिलाकर, रक्षाबंधन पर लगने वाले इस चंद्र ग्रहण का भारत में कोई धार्मिक या व्यावहारिक प्रभाव नहीं माना जा रहा है। इसलिए श्रद्धालु बिना किसी भ्रम के पूजा-पाठ और रक्षाबंधन का पर्व मना सकते हैं।
