दो हज़ार रुपये से अधिक की यूपीआई पेमेंट पर लगेगा चार्ज

Follow Us

 नई दिल्ली। UPI से महीने में एक लाख रुपये तक भुगतान लेने वाले छोटे दुकानदारों पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा। रेलवे, बीमा, संचार और ईंधन जैसे चुनिंदा सेवाओं के लिए भुगतान पर 2,000 रुपये से ऊपर सिर्फ पांच रुपये का फ्लैट शुल्क होगा।

बाकी बड़े व्यापारिक लेनदेन पर 2,000 रुपये पार होने के बाद 0.4 प्रतिशत एमडीआर लगेगा, लेकिन 75 हजार रुपये से ज्यादा की राशि के भुगतान के लिए शुल्क की अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति लेनदेन तय की गई है।

यह जानकारी मंगलवार को पहले राष्ट्रीय भुगतान निगम यानी NPCI ने दी और उसके बाद वित्त मंत्रालय की तरफ से इस बारे में विस्तृत दिशानिर्देश जारी किया।

वित्त मंत्रालय ने बताया है कि, ‘जरूरी सेवाओं पर सरकार ने शुल्क कम रखा है। रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसी श्रेणियों में 2,000 रुपये से ऊपर के यूपीआई भुगतान पर सिर्फ 5 रुपये का फ्लैट एमडीआर लगेगा।’

मंत्रालय ने आगे बताया, ‘मकसद यह है कि सार्वजनिक सेवाओं और कम मार्जिन वाले कारोबार में लागत न बढ़े। इनका कुल यूपीआइ के तहत व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को होने वाले भुगतान (पर्सन टू मर्चेंट-पी2एम) का कुल लेनदेन की संख्या का 17 फीसद और इनके व्यापारिक मूल्य का करीब 46 फीसद हिस्सा होता है। पूंजी बाजार के भुगतान अलग श्रेणी में रखे गए हैं।’

वित्त मंत्रालय ने आगे बताया, ‘म्यूचुअल फंड, प्रतिभूति, स्टॉक ब्रोकर और डीलरों को दिए जाने वाले भुगतान पर 0.02 प्रतिशत का मामूली एमडीआर लगेगा, अधिकतम सीमा 300 रुपये रहेगी।’

सरकार या एनपीसीआइ ने इस बात का जवाब नहीं दिया है कि कंपनियां क्या ग्राहकों पर बढ़े हुए एमडीआर का बोझ डालेंगी या नहीं।

सुरक्षा के लिए लगाया जा रहा शुल्क

वित्त मंत्रालय ने कहा है कि, ‘ग्राहकों की सुरक्षा इंतजाम मजबूत किये जा रहे हैं। यूपीआइ एप चलाने वाली कंपनियां प्लेटफॉर्म शुल्क या छिपा हुआ चार्ज नहीं लगा सकेंगी। बैंकों को सलाह दी गई है कि व्यापारी एमडीआर का बोझ ग्राहक पर न डालें। आम उपयोगकर्ता के लिए मुफ्त यूपीआई पर कोई मासिक कोटा, मात्रा सीमा या स्लैब नहीं होगा।’

वित्त मंत्रालय ने बताया, ‘बैंक और एनपीसीआई की ओर से लगने वाली रोजाना सीमा श्रेणी के हिसाब से एक से पांच लाख रुपये तक, सिर्फ सुरक्षा और जोखिम नियंत्रण के लिए है, शुल्क वसूलने का जरिया नहीं।’

साफ है कि इस बारे में कारोबारी संस्थानों को सिर्फ सलाह दी जा सकती है। जैसे कि अभी हम अभी भी देखते हैं कि कई दुकानदार डेबिट व क्रेडिट कार्ड से भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लेते हैं क्योंकि आरबीआइ ने उन्हें साफ तौर पर ऐसा करने से मना नहीं किया है।

एनपीसीआई ने अपनी इस बात को दोहराया है कि एमडीआर की नई व्यवस्था से करीब 95 प्रतिशत छोटे यूपीआई लेनदेन पर असर नहीं पड़ेगा। छोटे व्यापारियों और छोटे बाजारों के डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए एक अलग फंड भी बनाने की घोषणा की गई है।

साथ ही संस्था का दावा है कि नई शुल्क लगाने के बावजूद यूपीआइ अन्य प्रचलित डिजिटल भुगतान सुविधाओं जैसे डेबिट व क्रेडिट कार्ड और वैलेट से कम ही रहेगा।