ईरान से तनाव के बीच IDF में सैनिकों की कमी? इज़रायली सेना प्रमुख ने सैन्य दबाव पर जताई बड़ी चिंता

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ईरान। इस्राइली रक्षा बल (IDF) के चीफ ऑफ स्टाफ, लेफ्टिनेंट जनरल आयल जमीर ने ईरान के साथ जंग के बीच चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण इस्राइली सेना को बड़े नुकसान की आशंका है। उन्होंने यह चेतावनी बढ़ते दबाव और सैनिकों की गंभीर कमी का जिक्र करते हुए दी। आपको बता दें की टाइम्स ऑफ इस्राइल की रिपोर्ट के अनुसार, जमीर ने दबाव बढ़ने और सैनिकों की कमी वाली टिप्पणी सुरक्षा मामलों की कैबिनेट की बैठक के दौरान गुरुवार को की। उन्होंने इस्राइली सेना की तैयारी को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त कीं। उन्होंने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार में शामिल मंत्रियों से कहा, वे सरकार के सामने 10 चिंताओं को रेखांकित कर रहे हैं। जमीर ने सैनिकों को लेकर तत्काल विधायी उपाय किए जाने की जरूरत पर भी जोर दिया।

इस्राइली सेना के शीर्ष अफसर जमीर ने सेना में भर्ती को लेकर कानून, नागरिकों के कर्तव्य को स्पष्ट करने वाले कानून और अनिवार्य सैन्य सेवा का विस्तार किए जाने पर भी जोर दिया। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा, अगर ये कदम नहीं उठाए गए तो इस्राइल की सेना नियमित अभियान चलाने और अपनी आरक्षित प्रणाली को बरकरार रखने में संघर्ष कर सकती है। खास बात ये है कि जमीर पहले भी इन मुद्दों पर चिंता जता चुके हैं। ईरान के साथ जंग शुरू होने से करीब दो साल पहले, जनवरी 2024 में भी जमीर ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को सैनिकों की कमी से आगाह किया था। उन्होंने उस समय भी सैन्य परिचालन और त्वरित कार्रवाई पर पड़ने वाले असर के मामले में सरकार को सतर्क किया था। गौरतलब है कि 7 अक्तूबर, 2023 को हमास के हमलों के बाद गाजा में शुरू हुई इस्राइली सेना की कार्रवाई को करीब 29 महीने बीत चुके हैं। लंबे खिंच रहे संघर्ष के कारण इस्राइल कई मोर्चों पर संघर्ष कर रहा है। ईरान पर बीते 28 फरवरी को हमले के भी एक महीने होने वाले हैं। लंबी लड़ाई के कारण इस्राइली सेना में सैनिकों की कमी का संकट गहराने लगा है।

सैनिकों की कमी बेहद संवेदनशील मुद्दा है। इस मामले में सेना सांसदों को कई बार सूचना दे चुकी है। खबरों के मुताबिक इस्राइल में सैन्य परिचालन बड़ी चुनौती बनती जा रही है क्योंकि फिलहाल, आईडीएफ करीब 12 हजार सैनिकों की कमी का सामना करना पड़ रहा है। सेना से जुड़ा ये मुद्दा सैन्य सेवा को लेकर नागरिकों को दी गई छूट को लेकर हो रही राजनीतिक बहसों के कारण और भी जटिल हो गया है। इस्राइल के अति-रूढ़िवादी राजनीतिक दल कई समुदायों को दी गई छूट बरकरार रखने के लिए कानून बनाने पर जोर दे रहे हैं। दरअसल, इस्राइल के उच्च न्यायालय ने वर्ष 2024 में एक फैसला सुनाया था। अदालत ने अपने फैसले में कहा, हरेदी यहूदी (Haredi yeshiva) मदरसा छात्रों को अनिवार्य सैन्य सेवा से मिली छूट का कोई कानूनी आधार नहीं है। इस मुद्दे पर आई मीडिया रिपोर्ट्स से संकेत मिले हैं कि इस्राइल के करीब 80 हजार अति-रूढ़िवादी पुरुष अभी तक सेना में भर्ती नहीं हुए हैं। इनकी आयु 18 से 24 वर्ष के बीच है और ये सभी लोग वर्तमान में सेना में भर्ती होने के लिए पात्र हैं।