खेतों में सड़ रही फसलें, संकट में किसान; सरकार तत्काल दे राहत : अरुण वोरा

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दुर्ग। छत्तीसगढ़ में 24 से 27 सितंबर के बीच हुई मूसलाधार बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश और जलभराव से फसलों को नुकसान पहुंचा है। बस्तर क्षेत्र में करीब 4,000 हेक्टेयर धान की फसल प्रभावित होने और 300 से अधिक गांवों पर असर पड़ने की जानकारी सामने आई है। खेतों में पानी भरने से फसलें सड़ने लगी हैं और किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया है।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व विधायक अरुण वोरा ने कहा कि किसान पहले ही खेती की बढ़ती लागत से परेशान हैं। महंगे बीज, खाद और कीटनाशकों पर पैसा खर्च करने के बाद अब उनकी मेहनत की फसल बर्बाद हो रही है। बारिश के बाद मौसम में बदलाव और कीट-पतंगों के प्रकोप ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है।

अरुण वोरा ने कहा कि खेतों में जलभराव, फसलों के गिरने और मौसमी बीमारियों के कारण किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। धान के साथ-साथ सब्जियों, फल-फूल और अन्य फसलों को भी नुकसान पहुंचने की खबरें हैं। किसानों को एक ओर फसल बचाने के लिए दवाइयों पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर उत्पादन घटने से उनकी आय प्रभावित होने का खतरा है।

उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की कि बारिश से प्रभावित सभी जिलों और गांवों में तत्काल फसल क्षति का सर्वे कराया जाए। नुकसान का निष्पक्ष आकलन कराकर किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए तथा पात्र किसानों को फसल बीमा की राशि समय पर उपलब्ध कराई जाए। कृषि विभाग की टीमें गांवों में पहुंचकर किसानों को फसलों में लगने वाली बीमारियों की रोकथाम के लिए आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन और सहायता भी प्रदान करें।

अरुण वोरा ने कहा कि किसान प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और संकट की इस घड़ी में उन्हें अकेला नहीं छोड़ा जा सकता। सरकार को केवल घोषणाओं तक सीमित रहने के बजाय प्रभावित किसानों तक तत्काल राहत पहुंचानी चाहिए। उन्होंने मांग की कि फसल नुकसान का सर्वे शीघ्र पूरा कर मुआवजा वितरण की प्रक्रिया शुरू की जाए, ताकि किसानों को आर्थिक संकट से उबारने में मदद मिल सके।