इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में स्थापित हुई अत्याधुनिक बीएसएल-3 बायोसेफ्टी प्रयोगशाला

Follow Us

संक्रामक रोगों की पहचान, रोकथाम और वैक्सीन अनुसंधान को मिलेगी गति, कृषि, पशुपालन एवं मानव स्वास्थ्य के क्षेत्र में बढ़ेंगी वैज्ञानिक अनुसंधान की संभावनाएं : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर परिसर में अत्याधुनिक बायोसेफ्टी लेवल-3 (बीएसएल-3) प्रयोगशाला की स्थापना से छत्तीसगढ़ में जैव-सुरक्षा और संक्रामक रोग अनुसंधान को नई दिशा मिलेगी। यह प्रयोगशाला संक्रामक रोगजनकों की पहचान, उनके वैज्ञानिक अध्ययन, वैक्सीन एवं उपचार संबंधी अनुसंधान तथा उन्नत नैदानिक तकनीकों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप राज्य में वैज्ञानिक अनुसंधान, जैव-प्रौद्योगिकी और आधुनिक प्रयोगशाला सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। कृषि एवं पशुपालन आधारित अर्थव्यवस्था वाले छत्तीसगढ़ के लिए इस तरह की अत्याधुनिक वैज्ञानिक सुविधा विशेष महत्व रखती है।

उल्लेखनीय है कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर में छत्तीसगढ़ बायोटेक प्रमोशन सोसायटी द्वारा नवनिर्मित सुभाषचंद्र बोस बायोटेक इन्क्यूबेशन सेंटर के अंतर्गत स्थापित बीएसएल-3 प्रयोगशाला का लोकार्पण 28 सितंबर को किया गया था। मुख्यमंत्री साय ने इस उपलब्धि के लिए विश्वविद्यालय के कुलपति एवं छत्तीसगढ़ बायोटेक प्रमोशन सोसायटी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. गिरीश चंदेल के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रयोगशाला से पौधों, पशुओं और मानव स्वास्थ्य से जुड़े संक्रामक रोगों के अध्ययन एवं निगरानी को गति मिलेगी। विशेष रूप से पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाले जूनोटिक रोगों की पहचान, निगरानी और रोकथाम के प्रयासों को मजबूती मिलेगी। इससे रोगों की शीघ्र पहचान, संभावित प्रकोप से निपटने की तैयारी और उन्नत नैदानिक क्षमताओं के विकास में सहायता मिलेगी।

राहुल-प्रियंका के नेतृत्व में विपक्ष का ‘दिल्ली चलो मार्च, चुनाव प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर

उन्होंने कहा कि उच्च जैव-सुरक्षा मानकों के अनुरूप विकसित यह प्रयोगशाला वैज्ञानिकों एवं शोधार्थियों को संक्रामक रोगजनकों के अध्ययन तथा वैक्सीन और उपचार संबंधी अनुसंधान के अवसर उपलब्ध कराएगी। इससे कृषि जैव-प्रौद्योगिकी, पशु स्वास्थ्य और संक्रामक रोग अनुसंधान के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सकेगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मानव स्वास्थ्य, पशु स्वास्थ्य और पर्यावरण के परस्पर संबंधों पर आधारित ‘वन हेल्थ दृष्टिकोण को मजबूत बनाने में भी यह प्रयोगशाला उपयोगी सिद्ध होगी। इसके माध्यम से कृषि एवं पशुपालन क्षेत्र में रोगों की निगरानी और वैज्ञानिक समाधान विकसित करने की संभावनाएं बढ़ेंगी।

उन्होंने बताया कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय कृषि अनुसंधान, जैव-प्रौद्योगिकी और आधुनिक प्रयोगशाला सुविधाओं के विकास में पहले से महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। विश्वविद्यालय की फाइटोसैनिटरी प्रयोगशाला कृषि नमूनों, मृदा, जल, फसल अवशेषों सहित विभिन्न नमूनों के परीक्षण एवं अनुसंधान में अहम भूमिका निभाती है। बीएसएल-3 प्रयोगशाला की स्थापना से विश्वविद्यालय की अनुसंधान क्षमताओं को और मजबूती मिलेगी।

बीजापुर में छह माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण, 35 लाख रुपये का था इनाम

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह प्रयोगशाला वैज्ञानिकों, शोधार्थियों, प्रयोगशाला तकनीशियनों और विशेषज्ञों को उच्च जैव-सुरक्षा मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण एवं अनुसंधान के अवसर प्रदान करेगी। इससे राज्य में कुशल वैज्ञानिक मानव संसाधन के विकास, आधुनिक अनुसंधान तकनीकों के विस्तार और संक्रामक रोगों से निपटने की तैयारियों को प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही, राष्ट्रीय स्तर पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की अनुसंधान क्षमता और पहचान को भी मजबूती मिलेगी।