राहुल-प्रियंका के नेतृत्व में विपक्ष का ‘दिल्ली चलो मार्च, चुनाव प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर

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मंडी हाउस से पैदल मार्च में शामिल हुए अखिलेश यादव, भारी भीड़ के बीच धक्का-मुक्की; सुरक्षा कारणों से बंद छह मेट्रो स्टेशन शाम पांच बजे खुले

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई और चुनाव प्रक्रिया में सुधार की मांग को लेकर सोमवार को कांग्रेस नेता एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के आह्वान पर विपक्षी दलों ने ‘दिल्ली चलो मार्च निकाला। बाराखंभा से उच्चतम न्यायालय की ओर बढ़े इस मार्च के दौरान लुटियंस दिल्ली की सड़कों पर बड़ी संख्या में लोग जुटे। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने मंडी हाउस के आगे छात्र नेता नेरा बोरा के साथ पैदल मार्च का नेतृत्व किया। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव भी बाद में मार्च में शामिल हुए।

विपक्ष की ओर से उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर कर दी गई है। हालांकि, भारी भीड़ के कारण विपक्षी नेता अदालत तक नहीं पहुंच सके। कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी तथा उनके सहयोगी वकीलों ने याचिका दायर की। बताया गया कि अदालत बंद होने से पहले याचिका न्यायालय की वेबसाइट पर पंजीकृत हो गई।

राहुल गांधी सहित विपक्षी नेताओं ने सोमवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात का अनुरोध किया था। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश ने यह कहते हुए अनुरोध स्वीकार नहीं किया कि जिस मामले को लेकर विपक्ष उनसे मिलना चाहता है, वह पहले से ही न्यायालय में लंबित है। ऐसे में इस विषय पर अलग से मुलाकात करना उचित नहीं होगा।

इसके बाद विपक्षी नेताओं ने उच्चतम न्यायालय तक मार्च करने और याचिका दायर करने का निर्णय लिया। बाराखंभा से शुरू हुआ मार्च मंडी हाउस तक पहुंचा, जहां राहुल गांधी और प्रियंका गांधी बस से उतरकर पैदल आगे बढ़े। भारी भीड़ के कारण रास्ते में धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। मार्च में आगे चलकर अखिलेश यादव भी शामिल हो गए।

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उच्चतम न्यायालय में दायर याचिका में कुल 11 याचिकाकर्ताओं के नाम शामिल बताए गए हैं। इनमें राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े, सांसद सौगत रॉय, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसद संजय राउत, वामपंथी दलों के नेता बेबी और डी. राजा, झारखंड मुक्ति मोर्चा की नेता महुआ माझी, सुप्रिया सुले तथा इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के नेता मोहम्मद बशीर शामिल हैं।

याचिका दायर किए जाने के बाद अब इस मामले में सुनवाई की संभावित तारीख पर नजर है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उच्चतम न्यायालय मंगलवार को याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर सकता है। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। विपक्षी मार्च को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने मंडी हाउस और उच्चतम न्यायालय के आसपास बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों तथा अर्धसैनिक बलों की तैनाती की थी। भारी भीड़ के बावजूद समाचार तैयार किए जाने तक किसी भी नेता या प्रदर्शनकारी को हिरासत में लिए जाने की सूचना नहीं थी।

मार्च के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए विभिन्न स्थानों पर पुलिस बल तैनात रहा। विपक्षी नेताओं का काफिला उच्चतम न्यायालय से कुछ दूरी पर पहुंचकर लौट गया। भीड़ के कारण राहुल गांधी के अदालत तक नहीं पहुंच पाने की जानकारी भी सामने आई।

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सुरक्षा कारणों से दिल्ली मेट्रो रेल निगम ने सोमवार सुबह छह मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद कर दिए थे। ये स्टेशन शाम पांच बजे फिर से खोल दिए गए। निगम ने सामाजिक माध्यम ‘एक्स पर जानकारी दी कि दिल्ली मेट्रो के सभी स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार खोल दिए गए हैं तथा संबंधित स्टेशनों पर यात्रियों के लिए दूसरी मेट्रो लाइन में जाने की सुविधा भी उपलब्ध है।

मेट्रो स्टेशनों को 12 अक्टूबर को सुबह छह बजे से बंद किया गया था। पहले इन्हें शाम चार बजे तक बंद रखने की जानकारी दी गई थी, लेकिन बाद में यह अवधि बढ़ाकर शाम पांच बजे तक कर दी गई।

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने राहुल गांधी के नेतृत्व में निकाले गए मार्च की प्रशंसा की। उन्होंने सामाजिक माध्यम ‘एक्स पर लिखा कि दिल्ली एक बार फिर लोकतंत्र की रक्षा के लिए खड़े लोगों से भर गई है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार को लगता है कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल से हटाने से विरोध समाप्त हो जाएंगे, तो यह गलत है। उनके अनुसार, जंतर-मंतर केवल एक स्थान नहीं, बल्कि विरोध की भावना का प्रतीक है।

सोमवार के मार्च के बाद राहुल गांधी ने मंगलवार के लिए किसी नए कार्यक्रम की घोषणा नहीं की है। अब विपक्ष की याचिका पर उच्चतम न्यायालय की संभावित सुनवाई और आगे की राजनीतिक गतिविधियों पर नजर रहेगी।