धमतरी। सड़क हादसों में घायल लोगों को समय पर कैशलेस इलाज मिल सके, इसके लिए जिला प्रशासन ने पीएम राहत योजना के क्रियान्वयन की जमीनी स्थिति की समीक्षा शुरू की है। 6 अक्टूबर को जिला नोडल अधिकारी, आयुष्मान भारत योजना, बायोमेडिकल इंजीनियर और अन्य कर्मचारियों की टीम ने जिले के प्रमुख निजी अस्पतालों का निरीक्षण किया। टीम ने लुंकड़ नर्सिंग होम, धमतरी क्रिश्चियन हॉस्पिटल, श्रीराम हॉस्पिटल और ओजस्वी नर्सिंग होम पहुंचकर अस्पताल प्रबंधन से योजना के तहत उपचार की प्रक्रिया और सामने आ रही दिक्कतों की जानकारी ली।
अस्पताल संचालकों ने बताया कि पात्र दुर्घटना पीड़ितों के लिए विक्टिम आईडी जारी होने में देरी इलाज की प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली प्रमुख समस्या है। यह आईडी संबंधित थाना प्रभारी कार्यालय से जारी होती है और निर्धारित समय में उपलब्ध होना जरूरी है। निरीक्षण दल ने अस्पतालों को निर्देश दिए कि पात्र मरीजों को इलाज के लिए अनावश्यक इंतजार न कराया जाए और योजना के तहत जरूरी चिकित्सा सुविधा तत्काल उपलब्ध कराई जाए। साथ ही आईडी जारी करने में देरी कम करने के लिए पुलिस और अस्पतालों के बीच तत्काल समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया गया।
1.50 लाख रुपये तक मिलती है कैशलेस सुविधा: पीएम राहत योजना के तहत पात्र दुर्घटना पीड़ित को दुर्घटना की तारीख से अधिकतम 7 दिनों तक 1.50 लाख रुपये तक का कैशलेस आपातकालीन उपचार उपलब्ध कराया जाता है। इसके लिए हादसे के 24 घंटे के भीतर मरीज का राज्य के किसी भी अस्पताल में भर्ती होना जरूरी है। जिला प्रशासन ने सभी निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम संचालकों को पात्र हितग्राहियों को समय पर योजना का लाभ देने तथा इलाज में अनावश्यक देरी नहीं करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का उद्देश्य है कि हादसे के बाद मरीज को पहले इलाज मिले और औपचारिक प्रक्रियाएं बाद में पूरी हों। इसके लिए अस्पताल और पुलिस के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
