रायपुर। छत्तीसगढ़ मानव अधिकार आयोग के सामने सामाजिक बहिष्कार, प्रताडऩा और अधिकारों से जुड़े मामलों के बीच एक ऐसा आवेदन भी पहुंचा, जिसमें पौराणिक पात्र रावण और दुर्योधन को मानवाधिकार के नजरिए से जोड़ते हुए सवाल उठाया गया। आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष गिरधारी नायक ने बताया कि आवेदक ने पूछा कि हर साल दशहरे पर रावण का पुतला जलाया जाता है, तो क्या यह उसके मानवाधिकारों का हनन नहीं है। साथ ही सवाल किया गया कि यदि रावण का पुतला जलाया जाता है तो महाभारत के दुर्योधन का पुतला क्यों नहीं जलाया जाता।
आवेदक के सवाल पर आयोग ने स्पष्ट किया कि रावण मानव नहीं था, इसलिए यह मामला मानव अधिकार आयोग के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। इस तरह पौराणिक पात्र और आधुनिक मानवाधिकार की अवधारणा को जोड़कर किया गया यह आवेदन आयोग के लिए अलग तरह का मामला रहा।
26 साल में 74 हजार मामले, करीब 900 लंबित
गिरधारी नायक के अनुसार आयोग के गठन के बाद करीब 26 वर्षों में 74 हजार मामले सामने आए हैं। इनमें लगभग 900 मामले लंबित हैं। आयोग के समक्ष आने वाले मामलों में सामाजिक बहिष्कार से जुड़े प्रकरणों की हिस्सेदारी करीब 40 से 45 प्रतिशत बताई गई है। उन्होंने बताया कि आयोग में कई फर्जी शिकायतें भी आती हैं, जिनकी संख्या लगभग 3 से 4 हजार है।
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सामाजिक बहिष्कार के मामलों में व्यक्ति या परिवार को समाज से अलग करने, सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल नहीं होने देने, बातचीत बंद करने तथा आर्थिक और सामाजिक दबाव बनाने जैसी शिकायतें सामने आती हैं।
रायपुर के 1,800 सफाई कर्मचारियों की शिकायतें
राजधानी रायपुर में करीब छह हजार सफाई कर्मचारियों में से लगभग 1,800 कर्मचारियों की समस्याएं आयोग के सामने पहुंची हैं। शिकायतों पर संबंधित नगरीय निकायों को नोटिस जारी किए गए, जिसके बाद कई मामलों का निराकरण किया गया।
30 हजार ट्रक चालकों के बीमा की पहल
सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए आयोग ने आरटीओ और यातायात विभाग के अधिकारियों से चर्चा की है। आयोग ने ट्रक चालकों को प्रोत्साहित करने और सम्मानित करने का सुझाव भी दिया है। प्रदेश में 10 से अधिक ट्रक रखने वाले करीब तीन हजार ट्रक मालिकों से जुड़े लगभग 30 हजार चालकों का समूह बीमा कराने के लिए आयोग ने पत्र लिखा है। वाणिज्यिक ट्रक चालकों की सामाजिक सुरक्षा और दुर्घटना जोखिम देशभर में मानवाधिकार संस्थाओं के लिए भी चिंता का विषय रहे हैं।
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कुष्ठ रोग के 1,500 नए मामले चिन्हित
ग्रामीण क्षेत्रों में पहले तीन हजार से अधिक कुष्ठ रोगियों को चिन्हित किया गया था। दोबारा जांच में करीब 1,500 नए मामले सामने आने की जानकारी आयोग के समक्ष रखी गई है। आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों के साथ चर्चा की है।
आयोग की टीम ने विभिन्न जिलों में स्कूल, अस्पताल, जेल और थानों का निरीक्षण भी किया। बीजापुर दौरे के दौरान सरेंडर कर चुके नक्सलियों से बातचीत की गई। करीब 200 सरेंडर नक्सलियों से चर्चा में नौ ऐसे लोग सामने आए, जो बचपन में अनाथ हो गए थे। आयोग ने संबंधित कलेक्टरों से ऐसे बच्चों की पहचान कर उनकी देखभाल, शिक्षा और आवश्यक संरक्षण की व्यवस्था करने का आग्रह किया है। राज्य मानवाधिकार आयोग द्वारा स्कूल, अस्पताल और जेलों के निरीक्षण की प्रक्रिया पहले भी की जाती रही है
