‘आया राम, गया राम पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, दानम नागेंद्र की अयोग्यता बरकरार

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को तेलंगाना के खैराताबाद से विधायक रहे दानम नागेंद्र की उस याचिका पर राहत देने से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने तेलंगाना उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसके तहत उन्हें दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित किया गया था। शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय के फैसले में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए उनकी अयोग्यता बरकरार रखी।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने मामले की सुनवाई की। नागेंद्र की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी पेश हुए। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने नागेंद्र के मामले को ‘आया राम, गया राम से जोड़ते हुए हल्के-फुल्के अंदाज में पूछा कि क्या यह ‘आया राम, गया राम, फिर आया राम वाला मामला है। यह मुहावरा बार-बार राजनीतिक दल बदलने वाले नेताओं के संदर्भ में इस्तेमाल किया जाता है।

मुकुल रोहतगी ने संविधान की दसवीं अनुसूची का हवाला देते हुए दलील दी कि इसमें किसी सदस्य द्वारा राजनीतिक दल की सदस्यता छोडऩे के बाद उसे क्षमा किए जाने की गुंजाइश है। इस पर न्यायमूर्ति बागची ने ‘घर वापसी? टिप्पणी की। न्यायमूर्ति वी. मोहना ने भी स्पष्ट किया कि ऐसी ‘घर वापसी दल में हो सकती है, विधानसभा की सदस्यता में नहीं।

रोहतगी ने संविधान की दसवीं अनुसूची के अनुच्छेद 2(1)(बी) का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें दल के सदस्य के कृत्य को क्षमा किए जाने का प्रावधान है। हालांकि, पीठ ने स्पष्ट किया कि यह प्रावधान उस स्थिति से संबंधित है जब कोई सदस्य दल के निर्देश या व्हिप के विरुद्ध मतदान करता है। इसे राजनीतिक दल की सदस्यता स्वेच्छा से छोडऩे से संबंधित अनुच्छेद 2(1)(ए) पर लागू नहीं किया जा सकता।

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सुप्रीम कोर्ट ने इसी आधार पर नागेंद्र की दलील को स्वीकार नहीं किया और उच्च न्यायालय के फैसले में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। दानम नागेंद्र दिसंबर 2023 में भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के टिकट पर खैराताबाद विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित हुए थे। मार्च 2024 में उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर सिकंदराबाद लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा, हालांकि उन्हें भाजपा के जी. किशन रेड्डी से हार का सामना करना पड़ा। उस समय वह विधानसभा के सदस्य थे।

इसके बाद भाजपा के विधानसभा में दल के नेता अलेटी महेश्वर रेड्डी और बीआरएस विधायक पी. कौशिक रेड्डी ने नागेंद्र की अयोग्यता की मांग को लेकर याचिकाएं दायर कीं। तेलंगाना विधानसभा अध्यक्ष ने इन याचिकाओं को खारिज कर दिया था। तेलंगाना उच्च न्यायालय ने 18 सितंबर को विधानसभा अध्यक्ष के फैसले को रद्द करते हुए नागेंद्र को दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित कर दिया था। उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ नागेंद्र ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

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सुप्रीम कोर्ट में उनकी याचिका पर तत्काल सुनवाई के लिए 21 सितंबर को उल्लेख किया गया था। इसके बाद मामला प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष आया। उच्च न्यायालय के फैसले के बाद खैराताबाद विधानसभा सीट रिक्त घोषित की गई थी और इस सीट पर नए चुनाव का रास्ता खुल गया था। नागेंद्र ने 2018 और 2023 में खैराताबाद विधानसभा सीट से चुनाव जीता था। सुप्रीम कोर्ट के गुरुवार के फैसले के बाद उनकी अयोग्यता बरकरार रहने से इस मामले में उच्च न्यायालय का निर्णय प्रभावी रहेगा। यह फैसला संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत राजनीतिक दल बदलने से जुड़े विवादों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।