लद्दाख के हक के लिए सोनम वांगचुक का नया ऐलान, पुलिस गोलीबारी की बरसी पर निकालेंगे 20 KM पैदल मार्च

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लेह । दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल के बाद प्रसिद्ध जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने लद्दाख की मांगों को लेकर एक बार फिर बड़े आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग पर केंद्र सरकार पर दबाव बनाने के लिए वांगचुक बुधवार, 23 सितंबर को 20 किलोमीटर लंबी पैदल यात्रा शुरू करेंगे। इसके अगले दिन यानी 24 सितंबर को लद्दाख में ‘शहीद दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा। यह आंदोलन ठीक उसी पुलिस कार्रवाई के एक साल पूरे होने पर शुरू हो रहा है, जिसमें चार बेकसूर लोगों की जान चली गई थी।

23 सितंबर को पदयात्रा, गृह मंत्रालय से वार्ता बेनतीजा
वांगचुक और लद्दाख के प्रमुख सामाजिक-राजनीतिक नेताओं ने पहले 19 से 24 सितंबर तक विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई थी। आंदोलन से ठीक पहले लद्दाख के एक प्रतिनिधिमंडल ने राजधानी दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्रालय के आला अधिकारियों से मुलाकात कर अपनी मांगें रखी थीं। हालांकि, बातचीत में कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका और इस बीच खराब मौसम के चलते कार्यक्रम को कुछ दिनों के लिए टालना पड़ा था। अब नए शेड्यूल के तहत 23 सितंबर को वांगचुक 20 किलोमीटर का पैदल मार्च निकालेंगे और 24 सितंबर को गोलीबारी में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित कर आंदोलन को गति दी जाएगी।

15 लाख के मुआवजे पर भड़के वांगचुक: ‘यह न्याय नहीं, शर्म से झुक गया सिर’
लद्दाख प्रशासन द्वारा पिछले साल की पुलिस फायरिंग में मारे गए चार लोगों के परिजनों को 15-15 लाख रुपये और घायलों को 1 से 3 लाख रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की गई है। इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए सोनम वांगचुक ने कहा कि मुआवजे का यह ऐलान देखकर उनका सिर शर्म से झुक गया है। एक वीडियो संदेश जारी करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि मारे गए लोग निहत्थे मुसाफिर थे और सड़कों पर चल रहे थे। वांगचुक ने कहा कि पुलिसकर्मियों को गोली चलाने का आदेश तक नहीं मिला था, फिर भी एके-47 से सीधे सिर और सीने को निशाना बनाया गया। उन्होंने इसे सीधा हत्याकांड करार दिया।

‘शहीदों में करगिल युद्ध के पूर्व सैनिक भी शामिल, दबाई जा रही रिपोर्ट’
वांगचुक ने सनसनीखेज दावा किया कि पुलिस कार्रवाई में मारे गए लोगों में भारतीय सेना के पूर्व जवान भी शामिल थे, जिन्होंने करगिल युद्ध में देश की रक्षा की थी। उन्होंने सवाल उठाया कि घटना की जांच के लिए गठित पूर्व न्यायाधीश बीएस चौहान आयोग की रिपोर्ट को एक साल बीत जाने के बाद भी सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर पीड़ितों को उचित न्याय और सम्मानजनक मुआवजा नहीं मिला, तो वह देशहित में साधी गई चुप्पी तोड़ेंगे और एक-एक करके सारे तथ्य देश की जनता के सामने रखेंगे। वांगचुक ने पूरे देश से लद्दाख के अधिकारों और इंसाफ के समर्थन में एकजुट होने की अपील की है।