पुतिन से मिले मोदी, आर्थिक, रक्षा, ऊर्जा और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में सहयोग पर हुई चर्चा

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नयी दिल्ली। समें दोनों नेताओं ने व्यापारिक संबंधों को मजबूत करते हुए 2030 के लिए आर्थिक सहयोग कार्यक्रम लागू करने, बुनियादी ढांचे, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, रक्षा, संस्कृति और अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढाने पर विस्तार से चर्चा की। रूस-यूक्रेन युद्ध पर एक बार फिर भारत का रूख दोहराते हुए मोदी ने कहा कि विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीति से ही संभव है और भारत शांति प्रयासों में मदद के लिए तैयार है।

उन्होंने भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए पुतिन का रूस यात्रा का निमंत्रण भी स्वीकार किया। शिखर सम्मेलन के आयोजन स्थल भारत मंडपम में हुई वार्ता के बाद मोदी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि उन्होंने द्विपक्षीय मुद्दों के अलावा भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान दुनिया के कल्याण से संबंधित गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयासों पर बातचीत की। उन्होंने कहा कि बैठक में दोनों ने व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करने जिसमें 2030 के लिए आर्थिक सहयोग कार्यक्रम को लागू करना भी शामिल है पर भी चर्चा की। उल्लेखनीय है कि इस कार्यक्रम में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 100 अरब डालर तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।

मोदी ने कहा, ” दिल्ली में राष्ट्रपति पुतिन से मिलकर खुशी हुई। बिश्केक में हमारी मुलाकात के दो हफ्ते से भी कम समय बाद आज फिर उनसे मुलाकात हुई। आज की मुलाकात के दौरान हमने जिन मुद्दों पर बात की उनमें व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करना जिसमें 2030 के लिए आर्थिक सहयोग कार्यक्रम को लागू करना , बुनियादी ढांचे, ऊर्जा, तकनीक, रक्षा, संस्कृति और अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढाने पर और भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान दुनिया के कल्याण को आगे बढ़ाने के लिए किये जा रहे प्रयासों पर बातचीत शामिल है।

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“प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया कि दोनों नेताओं ने राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, कौशल और लोगों के बीच परस्पर संपर्क सहित विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने रूस की अंतरराष्ट्रीय औद्योगिक प्रदर्शनी “इनोप्रोम इंडिया” का स्वागत किया, जो 9 से 11 सितंबर तक पहली बार भारत में हो रही है। दोनों नेताओं ने व्यापार और औद्योगिक संबंधों को और बढ़ाने में इसके महत्व का उल्लेख किया और इसमें शामिल प्रतिभागियों से बातचीत की। दोनों नेताओं ने बहुपक्षीय स्तर पर भारत-रूस संबंधों, खासकर 2026 में भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स में सहयोग को लेकर विचारों का आदान-प्रदान किया।

उन्होंने आपसी हित के प्रमुख क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी अपने विचार साझा किए। इनमें पश्चिम एशिया और काला सागर क्षेत्र के संघर्ष शामिल हैं, जिनका समुद्री व्यापार और भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर असर पड़ा है। प्रधानमंत्री ने एक बार फिर कहा कि विवादों को हल करने के लिए बातचीत और कूटनीति ही आगे बढ़ने का रास्ता है और भारत शांति के प्रयासों में मदद के लिए तैयार है। उन्होंने दोनों देशों के बीच विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के प्रयास जारी रखने पर सहमति जतायी। यह साझेदारी लगातार महत्वपूर्ण प्रगति कर रही है और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच भी मजबूत बनी हुई है।

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पुतिन ने प्रधानमंत्री को 24वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए रूस आने का निमंत्रण दिया जिसे प्रधानमंत्री ने स्वीकार किया। शिखर सम्मेलन की तारीख दोनों देशों की आपसी सुविधा के अनुसार राजनयिक माध्यमों से तय की जायेगी।