नई दिल्ली । विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि ब्रिक्स के भीतर अधिक आर्थिक गतिविधियों और आर्थिक सुरक्षा से सदस्य देशों को आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी। उन्होंने ब्रिक्स देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने, कारोबारी साझेदारियों में विविधता लाने और मजबूत आपूर्ति नेटवर्क विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स व्यापार मंच को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा कि इस मंच का प्रमुख उद्देश्य सदस्य देशों के कारोबारियों के लिए नए साझेदार तलाशना, बाजारों तक पहुंच आसान बनाना और आपूर्ति नेटवर्क को आपस में जोडऩा है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से ब्रिक्स के लिए अधिक आर्थिक गतिविधि और आर्थिक सुरक्षा का अर्थ अधिक आत्मनिर्भरता है। इसका उद्देश्य वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़े रहते हुए प्रतिस्पर्धी बने रहना और किसी भी आर्थिक या अन्य संकट के झटकों को सहने की क्षमता को मजबूत करना है।
विदेश मंत्री ने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए बेहतर बाजार व्यवस्था, भरोसेमंद माल परिवहन व्यवस्था और स्थिर कारोबारी माहौल आवश्यक है। इसके साथ ही व्यावसायिक संबंधों में विविधता, पारदर्शी व्यापार और निवेश व्यवस्था भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि मजबूत आर्थिक सुरक्षा के लिए ऐसे ऊर्जा तंत्र की आवश्यकता है, जो किसी भी व्यवधान से निपट सकें। साथ ही ऐसे बदलावों के रास्ते अपनाने होंगे, जो अलग-अलग देशों की परिस्थितियों के अनुरूप हों।
ब्रिक्स व्यापार मंच निजी क्षेत्र के साथ संवाद और सहयोग के लिए समूह का प्रमुख मंच है। इसका आयोजन हर वर्ष उस देश में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले किया जाता है, जो उस वर्ष समूह की अध्यक्षता करता है। यह मंच व्यापार, निवेश, वित्त, प्रौद्योगिकी और सतत आर्थिक विकास जैसे विषयों पर विचार-विमर्श के लिए प्रमुख कारोबारी प्रतिनिधियों, सरकारी मंत्रियों और राष्ट्राध्यक्षों को एक साथ लाता है। ये सभी ब्रिक्स के आर्थिक एजेंडे को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण पक्ष हैं।
ब्रिक्स व्यापार मंच समूह की आर्थिक प्राथमिकताओं को तय करने में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है। यह ब्रिक्स व्यापार परिषद की ओर से तैयार सुझावों और दृष्टिकोण को सामने रखने तथा उन्हें नीति-निर्माताओं के साथ साझा करने का अवसर प्रदान करता है। व्यापार मंच के निष्कर्षों और व्यापार परिषद की सिफारिशों को अक्सर ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की घोषणाओं और उसके बाद तैयार होने वाले कार्य कार्यक्रमों में शामिल किया जाता है। इनमें ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार, निवेश, डिजिटल अर्थव्यवस्था, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, मानकीकरण सहयोग और मूल्य श्रृंखला के एकीकरण को बढ़ावा देने वाली पहल शामिल होती हैं।
जयशंकर ने कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच आर्थिक सहयोग को केवल व्यापार तक सीमित रखने के बजाय व्यापक आर्थिक साझेदारी में बदलने की जरूरत है। इसके लिए कारोबारी संपर्क, निवेश और आपूर्ति नेटवर्क को मजबूत करना महत्वपूर्ण होगा। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का मुख्य कार्यक्रम 12 सितंबर से शुरू होगा। इसमें सदस्य देशों के नेता भारत की अध्यक्षता में शुरू की गई विभिन्न पहलों और ब्रिक्स रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की संभावनाओं पर चर्चा करेंगे।
भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स ने व्यापार, डिजिटल प्रौद्योगिकी, वित्त, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक शासन में सुधार के क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया है। सितंबर में होने वाले शिखर सम्मेलन में मजबूत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, सीमा पार भुगतान व्यवस्था के एकीकरण और राष्ट्रीय मुद्राओं के अधिक उपयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के विकास, डिजिटल व्यापार और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे विषय भी प्रमुख एजेंडे में शामिल रह सकते हैं।
ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता, विकास वित्त, नए विकास बैंक के विस्तार तथा बहुपक्षीय वित्तीय और राजनीतिक संस्थानों में सुधार पर भी विशेष चर्चा होने की उम्मीद है। ब्रिक्स के भीतर आर्थिक सहयोग को मजबूत करने के प्रयासों के बीच भारत ने सदस्य देशों के बीच अधिक व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग पर जोर दिया है। इससे वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के दौर में आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक मजबूत और विविध बनाने के साथ सदस्य देशों की आर्थिक सुरक्षा तथा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
