रायपुर। राजधानी रायपुर में पोला त्योहार धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर बाजारों में रौनक देखने को मिला। लोगों ने बाजारों से मिट्टी से सजे नंदी-बैल, बर्तन, जांता व पूजा सामग्री की जमकर खरीदारी किए। पोला पर्व पर राजधानी के शास्त्री बाजार, गोल बाजार और अन्य प्रमुख चौकों पर रंग-बिरंगे मिट्टी और लकड़ी के बैल, उनके गले के लिए घुंघरू, रस्सी और विशेष खिलौने (जैसे मिट्टी के बर्तन व जांता-पोरा) की लोगों ने खरीदारी किया। रायपुर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में भी और पारंपरिक त्योहारों की सामग्रियों के साथ बाजार गुलजार नजर आई। इस पर्व के अवसर पर प्रदेश के किसानों और पशुपालकों ने खेतों में सहयोग करने वाले बैलों और नंदी की विशेष पूजा-अर्चना की। वहीं, राजधानी के रावणभाटा दशहरा मैदान में पारंपरिक बैल दौड़, बैल श्रृंगार और किसान सम्मान समारोह आयोजनों किया गया था। साथ ही इस अवसर पर घरों में बच्चों ने मिट्टी के खिलौनों (बैल-बछिया) की पूजा कर उनके साथ खेलने का भी आनंद लिया।सभी के घरों में इस अवसर पर पारंपरिक पकवान जैसे ठेठरी, खुरमी का विशेष आनंद लिया गया।
पोरा तिहार छत्तीसगढ़ में केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं है, बल्कि यह प्रदेश की ग्रामीण संस्कृति, कृषि परंपरा और लोक जीवन का प्रतीक है। घरों में ठेठरी- खुरमी जैसे पारंपरिक पकवान बनाए और बच्चे मिट्टी के बैलों से खेले। वहीं इस त्यौहार पर किसानों द्वारा बैल दोड़ का आयोजन भी किया गया। प्रतिवर्ष अनुसार राजधानी रायपुर के रावणभाठा में बैल दौड़ का आयोजन किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में किसान अपने बैलों को प्रतियोगिता के लिए सजाकर लाए और प्रतियोगिता में भाग लिया। आयोजन समिति द्वारा इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले किसानों को आकषर्क पुरस्कार भी दिया गया।

