नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महान गायक, संगीतकार और गीतकार डॉ. भूपेन हजारिका की 100वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने कहा कि भूपेन हजारिका ने अपनी आवाज और संगीत के माध्यम से असम की आत्मा और पूरे पूर्वोत्तर की भावना को देशभर तक पहुंचाने का काम किया।प्रधानमंत्री ने कहा कि डॉ. हजारिका के गीतों में समाज के अलग-अलग वर्गों की भावनाओं और विचारों की गहरी अभिव्यक्ति दिखाई देती थी। उनके संगीत ने भाषा और क्षेत्र की सीमाओं को पार करते हुए लोगों को एक-दूसरे के करीब लाने का काम किया।
संगीत के जरिए लोगों की भावनाओं को दी आवाज
डॉ. भूपेन हजारिका को याद करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उनकी आवाज में असम और पूर्वोत्तर की सांस्कृतिक पहचान की स्पष्ट झलक मिलती थी। उन्होंने अपने संगीत के जरिए आम लोगों के विचारों, भावनाओं और संवेदनाओं को बेहद प्रभावशाली तरीके से अभिव्यक्त किया।प्रधानमंत्री ने कहा कि हजारिका के गीत और संगीत केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने समाज को जोड़ने और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यही वजह है कि उनकी रचनाएं आज भी देशभर में लोकप्रिय हैं।
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गुवाहाटी में जन्म शताब्दी समारोह को किया याद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुवाहाटी में आयोजित डॉ. भूपेन हजारिका के जन्म शताब्दी समारोह के शुभारंभ में शामिल होने की अपनी स्मृतियों को भी साझा किया। उन्होंने कहा कि उस अवसर से जुड़ी यादें आज भी उनके मन में ताजा हैं।उन्होंने कहा कि भूपेन हजारिका का सांस्कृतिक और भावनात्मक योगदान असम तथा पूर्वोत्तर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उनकी कला ने पूरे देश को प्रभावित किया। उनकी विरासत भारतीय सांस्कृतिक चेतना में लंबे समय तक जीवित रहेगी।
आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा योगदान
प्रधानमंत्री ने कहा कि डॉ. भूपेन हजारिका का जीवन और रचनात्मक कार्य केवल संगीत के क्षेत्र तक सीमित नहीं था। उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज, संस्कृति और मानवीय संवेदनाओं को भी गहराई से प्रभावित किया।पीएम मोदी ने विश्वास जताया कि भूपेन हजारिका की कला, संगीत और मानवीय मूल्यों से जुड़ी रचनाएं आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करती रहेंगी।प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपने संदेश में डॉ. भूपेन हजारिका को उनकी 100वीं जयंती पर याद करते हुए कहा कि उनकी आवाज ने असम की आत्मा और पूर्वोत्तर की भावना को पूरे देश तक पहुंचाया, जबकि उनके संगीत ने लोगों के विचारों और भावनाओं को अभिव्यक्ति देकर उन्हें करीब लाने का काम किया।
